प्राकृतिक आपदा पर अध्यनन के लिए गृहमंत्री द्वारा कमेटी बनाने का निर्णय अभिनंदनीय: अनुराग सिंह ठाकुर

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सदन में बहानेबाज़ी कर चर्चा से भागना विपक्ष की आदत

शिमला। पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं की पुनरावृत्ति को देखते हुए बहु-क्षेत्रीय केंद्रीय टीम के गठन के निर्णय को अभिनंदनीय बताते हुए इस से आपदा नियंत्रण की दिशा में बल मिलने की बात कही है।

साथ ही अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि सदन में बहानेबाज़ी कर चर्चा से भागना विपक्ष की आदत बन चुका है।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ केंद्र की मोदी सरकार का हिमाचल के प्रति विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल के हर सुख दुख में साथ खड़ी मिलती है। देवभूमि हिमाचल विगत कुछ दिनों से बाढ़-बारिश व बादल फटने की घटना से प्रकृति की मार झेल रहा है।

प्राकृतिक आपदा के चलते हिमाचल में बड़े पैमाने पर जान व माल का नुक़सान हो रहा है। विगत कुछ वर्षों में हिमाचल में प्राकृतिक आपदा की घटनाओं में बड़े पैमाने पर बढ़ोत्तरी देखी गई है।

इसी के दृष्टिगत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देवभूमि में प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता को देखते हुए एक बहु-क्षेत्रीय केंद्रीय टीम के गठन का निर्देश दिया है।

इस केंद्रीय टीम में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे, एक भूविज्ञानी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के विशेषज्ञ हिमाचल में बार-बार हो रही बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और मूसलाधार वर्षा की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि की घटनाओं का अध्यनन करेगी।

गृहमंत्री द्वारा लिया गया यह निर्णय अभिनंदनीय है जिससे हिमाचल में बार-बार आपदा आने के सटीक कारणों का पता चलेगा साथ ही इसके नियंत्रण की कोशिशों में बल मिलेगा”

अनुराग सिंह ठाकुर में कहा “पिछले 11 वर्षों के भाजपा सदन को गरिमापूर्ण तरीक़े से चलाने व हर विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार दिखी और हमारी आगे भी यही मंशा है, मगर विपक्ष ने सदा ही किसी ना किसी बहाने से चर्चा से भागने का काम किया है।

विपक्ष संसद में सकारात्मक भूमिका निभाते हुए चर्चा की बजाय झूठ, भय व भ्रम की स्थिति बनाकर चर्चा से किनारा करने को अपना कोर एजेंडा बना लिया है। विपक्ष की मौजूदा स्थिति एक स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिये ठीक नहीं है।

जनता सांसदों को चुनकर सदन इसलिए भेजती है कि वहाँ उनके हित की बात हो, मगर विपक्ष का चर्चा ना करके हंगामा खड़ा करना और वॉकआउट करने का रवैया निराशा देता है”

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