निवेश अनुकूलता सूचकांक 2026 : पर्वतीय एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों में हिमाचल प्रदेश तीसरे स्थान पर

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शिमला। हिमाचल सरकार की निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता एवं सतत प्रयासों को नीति आयोग द्वारा जारी नवीनतम ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स (Investment Friendliness Index-IFI) 2026 में सराहा गया है।

इस सूचकांक में हिमाचल प्रदेश ने पर्वतीय एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों की श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त किया है तथा फ्रंटरनर श्रेणी में स्थान हासिल किया है।

यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने तथा विभिन्न नीतिगत उपायों के माध्यम से निवेशकों का विश्वास सुदृढ़ करने की दिशा में किए गए सतत प्रयासों को दर्शाती है।

हिमाचल प्रदेश की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, “हमारी सरकार ने लगातार बीआरएपी (Business Reforms Action Plan) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है, जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने में सफलता मिली है।

राज्य की यह शीर्ष रैंकिंग हमारी सुधारोन्मुखी कार्यप्रणाली तथा पारदर्शी, दक्ष एवं निवेशक-अनुकूल वातावरण विकसित करने की प्रतिबद्धता का परिणाम है।

राज्य की यह उत्कृष्ट रैंकिंग प्रमुख स्तंभों में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाती है, जो सतत औद्योगिक विकास एवं रोजगार सृजन के लिए सुदृढ़ आधार प्रदान करती है। निवेश अनुकूलता सूचकांक 2026 में विशेष रूप से मानव संसाधन, महिला कार्यबल की भागीदारी, संस्थागत प्रभावशीलता, नियामकीय वातावरण तथा निवेशक-अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था को राज्य की प्रमुख ताकत के रूप में रेखांकित किया गया है, जो हिमाचल प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक बनाते हैं।

हिमाचल प्रदेश ने इन्फ्रास्ट्रक्चर पिलर में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जो लॉजिस्टिक्स, डिजिटल कनेक्टिविटी, विद्युत अवसंरचना तथा औद्योगिक सुविधा उपलब्ध कराने में राज्य के मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है।

रिसोर्सेज पिलर में भी राज्य प्रथम स्थान पर रहा, जिसका आधार उच्च श्रमबल भागीदारी, सशक्त मानव संसाधन संकेतक तथा देश में महिला कार्यबल की सर्वाधिक भागीदारी दरों में से एक है।

रेगुलेटरी ईज पिलर में राज्य को चौथा स्थान प्राप्त हुआ, जो अनुकूल कारोबारी वातावरण एवं निवेशक सुविधा तंत्र को दर्शाता है।

वहीं इंस्टीट्यूशनल एनवायरनमेंट पिलर में राज्य का प्रदर्शन कम साइबर अपराध, प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली तथा स्थिर नियामकीय वातावरण के कारण सराहा गया।

बिजनेस क्लाइमेट पिलर में राज्य को पाँचवाँ स्थान प्राप्त हुआ, जो जारी सुधारों की सफलता को रेखांकित करता है।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा, “यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों की मान्यता है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हम औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने तथा हिमाचल प्रदेश में रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए अपने प्रयास निरंतर जारी रखेंगे।”

प्रधान सचिव (उद्योग) एम सुधा देवी ने बताया कि राज्य को कंस्ट्रक्शन परमिट एनेबलर्स, हेल्थकेयर सेक्टर रिफॉर्म्स तथा सर्विसेज सेक्टर रिफॉर्म्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए टॉप अचीवर्स श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।

राज्य की स्टेट सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से वर्तमान में 30 विभागों की 180 सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे निवेशकों एवं उद्यमों को सुगम एवं प्रभावी सेवा उपलब्ध हो रही है।

उद्योग विभाग राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और सुदृढ़ बनाने तथा प्रगतिशील सुधारों एवं हितधारक-केंद्रित प्रशासन के माध्यम से निवेशकों का विश्वास और अधिक मजबूत करने की दिशा में कार्य करता रहेगा।

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