कांग्रेस राज में बदहाल हुआ शिमला
शिमला। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार और नगर निगम शिमला की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन में प्रदेश की राजधानी शिमला की हालत लगातार खराब होती जा रही है।
शहर में नई विकास योजनाओं का अकाल है और कांग्रेस सरकार केवल उन परियोजनाओं का उद्घाटन कर श्रेय लेने का प्रयास कर रही है, जिनकी शुरुआत पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई थी।
नंदा ने कहा कि कांग्रेस सरकार को सार्वजनिक रूप से शिमला की जनता को बताना चाहिए कि अपने कार्यकाल में उसने राजधानी के लिए कितनी नई बड़ी परियोजनाएं स्वीकृत कीं, उनके लिए कितना नया बजट दिया और धरातल पर कितने नए कार्य शुरू किए। पुरानी परियोजनाओं पर नया फीता काटने से विकास नहीं होता।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब स्थिति इससे भी गंभीर हो गई है। नगर निगम शिमला के अपने राजस्व स्रोतों से प्राप्त धन को अलग-अलग मदों में डायवर्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रॉपर्टी टैक्स सहित नगर निगम के विभिन्न आय स्रोतों से आने वाले धन को नगर निगम और शिमला शहर के विकास पर खर्च करने के बजाय अन्य मदों तथा दूसरे नगर निकायों की ओर मोड़ना राजधानी की जनता के अधिकारों के साथ अन्याय है।
कर्ण नंदा ने कहा कि नगर निगम शिमला की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार निगम का अपना बाकायदा Tax Department है, जो नगर निगम क्षेत्र में संपत्ति कर के आकलन और संग्रह के लिए जिम्मेदार है।
संपत्ति कर की मांग प्रत्येक वर्ष उठाई जाती है और इसका भुगतान नगर निगम के पक्ष में किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि शिमला की जनता द्वारा नगर निगम को दिया गया टैक्स आखिर शिमला की सुविधाओं और विकास पर क्यों नहीं खर्च होना चाहिए?
उन्होंने कहा कि नगर निगम की आधिकारिक व्यवस्था में Finance, Contract and Planning Committee को बजट तैयार करने, कर सहित राजस्व बढ़ाने के प्रस्तावों, निगम की प्राप्तियों और खर्च तथा समग्र वित्तीय मामलों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। इसलिए नगर निगम की आय और उसके उपयोग में पूरी पारदर्शिता आवश्यक है।
नंदा ने कहा कि नगर निगम की वेबसाइट पर Budget Estimates 2026-27, Budget Estimates 2025-26 और 31 मार्च 2025 की Balance Sheet भी आधिकारिक वित्तीय दस्तावेजों के रूप में सूचीबद्ध हैं।
भाजपा मांग करती है कि कांग्रेस शासित नगर निगम और प्रदेश सरकार जनता के सामने स्पष्ट विवरण रखें कि पिछले तीन वर्षों में निगम को प्रॉपर्टी टैक्स, फीस और अन्य स्रोतों से कितना राजस्व प्राप्त हुआ, उसमें से कितना पैसा शिमला शहर में खर्च हुआ तथा कितना पैसा अन्य मदों में स्थानांतरित अथवा डायवर्ट किया गया।
भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि शिमला की जनता से वसूला गया पैसा शिमला की सड़कों, रास्तों, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग, सार्वजनिक सुविधाओं और वार्डों के विकास पर खर्च होना चाहिए। यदि नगर निगम की आय को लगातार दूसरी तरफ मोड़ा जाएगा तो निगम अपनी मूल जिम्मेदारियां कैसे पूरी करेगा?
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के आय के साधनों को कमजोर करने की यही नीति जारी रही तो भविष्य में स्थिति इतनी खराब हो सकती है कि निगम को कर्मचारियों के वेतन और दूसरी आवश्यक देनदारियों के भुगतान में भी कठिनाई का सामना करना पड़े। यह राजधानी के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
नंदा ने कहा कि एक तरफ शिमला की सड़कें और नागरिक सुविधाएं दबाव में हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निगम को नए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के बजाय उसके मौजूदा संसाधनों पर भी दबाव बनाया जा रहा है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि नगर निगम ने स्वयं Municipal Bonds के माध्यम से धन जुटाने के लिए Transaction Advisor-cum-Merchant Banker नियुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की है। इससे साफ है कि निगम को विकास के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है।
कर्ण नंदा ने कहा, “कांग्रेस सरकार शिमला को एटीएम समझना बंद करे। शिमला की जनता टैक्स देती है तो उसे बदले में बेहतर सड़कें, सफाई, पार्किंग और नागरिक सुविधाएं मिलनी चाहिए।
भाजपा के समय शुरू हुई परियोजनाओं का उद्घाटन कर फोटो खिंचवाना और दूसरी तरफ नगर निगम की आर्थिक ताकत कमजोर करना विकास का मॉडल नहीं हो सकता।”
उन्होंने मांग की कि प्रदेश सरकार और नगर निगम शिमला नगर निगम की आय, प्रॉपर्टी टैक्स संग्रह, सरकार से प्राप्त अनुदान, विभिन्न मदों में किए गए फंड ट्रांसफर तथा पिछले तीन वर्षों के विकास व्यय का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करें।
भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच मजबूती से उठाएगी और शिमला के हितों के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं होने देगी।
