हिमाचल में अगले साल बनेगी भाजपा सरकार, कांग्रेस की विदाई तय : हिमंत बिस्वा सरमा

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हिमाचल की महिलाओं और बेरोजगार युवाओं से कांग्रेस ने किया विश्वासघात

शिमला। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को शिमला में भारतीय जनता पार्टी की विशाल लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा को संबोधित करते हुए कांग्रेस, राहुल गांधी और हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला।

उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार की विदाई तय है और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।

उन्होंने कहा कि शिमला में उमड़ा जनसमर्थन साफ संकेत दे रहा है कि अगले वर्ष इसी समय हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री होगा।

मुख्यमंत्री सरमा ने देवभूमि हिमाचल प्रदेश को नमन करते हुए कहा कि वह मां कामाख्या की धरती असम से देवी-देवताओं की पावन भूमि हिमाचल आए हैं। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रदेश में राजनीतिक परिवर्तन के लिए अभी से जुट जाएं।

हिमंत बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिस ईवीएम के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में चुनाव हुए और कांग्रेस सत्ता में आई, उसी मतदान प्रणाली के विरोध में मुख्यमंत्री दिल्ली में प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “यदि कांग्रेस को ईवीएम पर भरोसा नहीं है, तो सुक्खू बताएं कि वह उसी चुनाव प्रणाली से प्राप्त जनादेश के आधार पर मुख्यमंत्री क्यों बने हुए हैं?”

सरमा ने कहा कि कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीतती है तो ईवीएम पर सवाल नहीं उठाती, लेकिन भाजपा की जीत होते ही निर्वाचन आयोग और मतदान प्रणाली पर आरोप लगाने लगती है।

उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें चुनाव प्रणाली पर इतनी आपत्ति है तो वह अपनी रायबरेली लोकसभा सीट की जीत और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के संदर्भ में भी अपना रुख स्पष्ट करें।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति में एक ही चुनाव प्रणाली को अपनी जीत पर सही और भाजपा की जीत पर गलत बताने का दोहरा मापदंड दिखाई देता है।

असम के मुख्यमंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूचियों की शुद्धता लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। सरमा ने कहा कि पात्र भारतीय नागरिकों के मतदान अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए, लेकिन अपात्र नामों की पहचान और नियमानुसार कार्रवाई का भी विरोध नहीं होना चाहिए।

उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि जब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के नाम मतदाता सूचियों में मौजूद हैं, तो वे किस आधार पर पूरी निर्वाचन प्रक्रिया को संदिग्ध बता रहे हैं।

सरमा ने कहा कि भारत में सरकार बदलने का रास्ता जनता का जनादेश है, न कि राजनीतिक दबाव अथवा अराजकता। उन्होंने कांग्रेस पर बांग्लादेश और नेपाल की राजनीतिक घटनाओं का उदाहरण देकर देश में अस्थिरता का वातावरण बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “भारत में सत्ता परिवर्तन जनता के वोट से होता है। कांग्रेस को लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करना सीखना चाहिए।”

मुख्यमंत्री सरमा ने 1 नवंबर की तारीख का उल्लेख करते हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सिख समुदाय के विरुद्ध भयावह हिंसा हुई थी। उन्होंने दिल्ली में हजारों सिखों की हत्या का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेतृत्व की ऐतिहासिक जवाबदेही पर सवाल उठाए।

सरमा ने राहुल गांधी से मांग की कि वह 1 नवंबर को दिल्ली में राजनीतिक रैली करने से पहले 1984 के सिख विरोधी दंगों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की बात करने वाली कांग्रेस को अपने इतिहास के कठिन प्रश्नों का भी उत्तर देना चाहिए।

हिमंत बिस्वा सरमा ने असम और हिमाचल प्रदेश की सरकारों के कामकाज की तुलना करते हुए कहा कि असम में भाजपा सरकार ने एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था और उनके अनुसार लगभग 1.07 लाख युवाओं को रोजगार प्रदान किया गया।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने पांच लाख रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन प्रदेश के युवा आज भी रोजगार के अवसरों का इंतजार कर रहे हैं।

सरमा ने सवाल किया, “असम में हमने एक लाख नौकरियों का वादा करके उससे अधिक नौकरियां दीं। हिमाचल में कांग्रेस ने पांच लाख रोजगार का वादा किया था, अब सुक्खू सरकार बताए कि कितने युवाओं को रोजगार मिला?”

उन्होंने कहा कि असम में उनकी सरकार लगभग सात लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1,250 की सहायता प्रदान कर रही है, जबकि हिमाचल में कांग्रेस ने महिलाओं को 1,500 प्रतिमाह देने का वादा किया था।

उन्होंने प्रदेश की महिलाओं से पूछा कि क्या उन्हें कांग्रेस की घोषणा के अनुरूप आर्थिक सहायता मिल रही है।

सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने महिलाओं और युवाओं की उम्मीदों के आधार पर सत्ता हासिल की, लेकिन अपने प्रमुख चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही।

असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ईवीएम पर आरोप लगाती है, जबकि मतपत्रों से होने वाले चुनावों में भी उसे राजनीतिक पराजय का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश के जिला परिषद चुनावों तथा विभिन्न राज्यों के विधान परिषद चुनावों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि भाजपा ने मतपत्रों के माध्यम से भी महत्वपूर्ण चुनावी सफलताएं हासिल की हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी पराजय के लिए मतदान प्रणाली को दोष देने के बजाय जनता से किए गए वादों और अपने संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए।

सरमा ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की।

उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर राम मंदिर के प्रति अपने राजनीतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट नहीं करने का आरोप लगाया।

उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री के चयन के ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के संदर्भ में कांग्रेस पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल के सम्मान में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण करवाकर उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दी।

सरमा ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अवहेलना का आरोप लगाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास और आचरण का आत्ममंथन करना चाहिए।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश वीरों और देवी-देवताओं की भूमि है तथा यहां की जनता राजनीतिक वादों और उनके क्रियान्वयन का मूल्यांकन करना जानती है।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार की कथित वादाखिलाफी, बेरोजगारी और जनसमस्याओं के कारण प्रदेश में राजनीतिक परिवर्तन का वातावरण बन रहा है।

उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे घर-घर जाकर कांग्रेस सरकार से चुनावी गारंटियों का हिसाब मांगें और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाएं।

उन्होंने कहा कि भाजपा का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश में सुशासन, विकास और जनता के प्रति जवाबदेह सरकार स्थापित करना है।

भाजपा की लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा शिमला के पुराने लोकल बस स्टैंड स्थित गुरुद्वारा साहिब पार्किंग से प्रारंभ हुई। पदयात्रा विक्ट्री टनल और विधानसभा मार्ग से होते हुए चौड़ा मैदान पहुंची, जहां विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।

पदयात्रा में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर, सांसद सुरेश कश्यप, राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार, प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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