हिमाचल अपने अधिकारों से नहीं करेगा समझौता : मुख्यमंत्री सुक्खू

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प्रदेश सरकार उचित समय पर महंगाई भत्ते की शेष किस्तों का करेगी भुगतान

शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार किसी के सामने नहीं झुकेगी।

मुख्यमंत्री ने सिरमौर जिला के सराहां में वामन द्वादशी मेले के समापन अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए हाल ही में हुए समझौते से एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।

उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना पर कई वर्षों से सहमति नहीं बन पा रही थी। पिछली भाजपा सरकार ने विद्युत परियोजना की लागत वहन करने पर सहमति जताई थी, जबकि वर्तमान राज्य सरकार ने यह पक्ष रखा कि जिन राज्यों को पानी की आवश्यकता है, उन्हीं राज्यों को परियोजना की लागत वहन करनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश पर परियोजना के खर्च की जिम्मेदारी डालना सर्वथा अनुचित है।

सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की जनता के आशीर्वाद और सहयोग से हुए इस समझौते से राज्य के खजाने की लगभग 3,000 करोड़ रुपये की बचत होगी, जो पूर्व की शर्तों के अनुसार विद्युत परियोजना के निर्माण पर खर्च किए जाने थे।

उन्होंने कहा कि परियोजना के शुरू होने के बाद हिमाचल प्रदेश को हर वर्ष लगभग 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को बीबीएमबी की लंबित बकाया राशि के भुगतान को लेकर भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।

उन्होंने आशा व्यक्त कि इस बकाया राशि के भुगतान के संबंध में शीघ्र ही सर्वाेच्च न्यायालय में हिमाचल प्रदेश के हित में निर्णय होगा।

वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने 23 वर्षों के बाद सर्वाेच्च न्यायालय में यह कानूनी लड़ाई जीत ली है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद राज्य के खजाने में 401 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। उन्होंने कहा कि होटल से राज्य को लगभग 2 करोड़ रुपये प्रतिमाह का राजस्व प्राप्त हो रहा है।

सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) सहायता बंद कर दी है, जिसके कारण राज्य को लगभग 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

उन्होंने कहा कि वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद राज्य सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को समय पर वेतन और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित कर रही है तथा लंबित बकाया राशि भी जारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि क्लास-3 के पेंशनरों का पूरा बकाया चुका दिया गया है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि महंगाई भत्ते की शेष किस्तों का भुगतान भी उचित समय पर कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल कर दी थी और भविष्य में और अधिक कर्मचारियों को इसके दायरे में लाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि भाजपा राज्य में सत्ता में वापस आती है तो वह कर्मचारियों के लिए ओपीएस को बंद कर देगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के महत्व पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मासिक आमदनी 25,000 रुपये से से 30,000 रुपये तक करने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। किसानों व पशुपालकों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से दूध के खरीद मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि तथा प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि अदरक को भी समर्थन मूल्य व्यवस्था के दायरे में लाया गया है।

सुक्खू ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार सीबीएसई स्कूल खोल रही है। उन्होंने कहा कि निजी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षा पर लगभग 1 लाख रुपये खर्च होते हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में इसी प्रकार की सुविधाएं काफी कम लागत पर उपलब्ध करवाई जाएंगी।

उन्होंने कहा कि वह एक साधारण पृष्ठभूमि से संबंध रखते हैं और इसलिए आम लोगों के सामने आने वाली कठिनाइयों से भलीभांति परिचित हैं।

मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में भूमि से संबंधित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि बद्दी-बरोटीवाला क्षेत्र में 5,000 बीघा से अधिक भूमि कम रियायती दरों पर अपने पसंदीदा उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए दी गई।

हाल ही के वर्षों में आई प्राकृतिक आपदा के उबरने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रभावितों को दी जा रही सहायता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए वित्तीय सहायता राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 8.5 लाख रुपये कर दी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के लिए 1,500 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की थी, लेकिन राज्य को इस घोषणा के तहत अभी तक कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अब तक लगभग 3,000 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि बचाई है। उन्होंने कहा कि इन संसाधनों का उपयोग अनाथ बच्चों, विधवाओं और समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए किया जा रहा है।

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