राज्य फाॅरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, जुन्गा में किया गया एनएबीएल मूल्यांकन

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शिमला। नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (एनएबीएल ) के मूल्यांकनकर्ताओं की एक टीम ने 28 और 29 अप्रैल को शिमला हिल्स के जुंगा में स्थित राज्य फाॅरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, एसएफएसएल का दो दिवसीय मूल्यांकन किया।

मूल्यांकन टीम का नेतृत्व डॉ ओंकार संतोषराव मोंढे ने किया और इसमें देश भर के प्रतिष्ठित फाॅरेंसिक संस्थानों के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ कविता गोयल, डॉ राजीव कवात्रा, डॉ अमन कुमार यादव और डॉ एच जे त्रिवेदी शामिल रहे।

टीम ने प्रयोगशाला की गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, तकनीकी प्रणाली और उसके फाॅरेंसिक विशेषज्ञों की दक्षता का व्यापक मूल्यांकन किया।

नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज द्वारा वार्षिक मूल्यांकन गुणवत्ता मानकों, परिचालन दक्षता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानदंडों के अनुरूप फाॅरेंसिक विशेषज्ञों की दक्षता का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है।

इन मानकों का पालन करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि फाॅरेंसिक रिपोर्ट जांच एजेंसियों को सौंपी जाती हैं और अंततः कानून की अदालतों में प्रस्तुत की जाती हैं, जहां वे न्याय प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

डॉ मीनाक्षी महाजन, निदेशक फाॅरेंसिक सेवाएं ने बताया कि राज्य फाॅरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, हिमाचल प्रदेश, शिमला हिल्ज, जुंगा 2018 से नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (एनएबीएल) मान्यता प्राप्त है और वर्तमान में इसमें दस प्रभाग हैं।

इनमें जीव बायोलाॅजी एवं सीरोलाॅजी विभाग, रसायन एवं विषविज्ञान विभाग, डीएनए विभाग, दस्तावेज एवं फोटोग्राफी विभाग, डिजिटल फाॅरेंसिक विभाग, एनडीपीएस विभाग, भौतिक एवं बैलिस्टिक्स विभाग, वाइस विश्लेषण विभाग, फाॅरेंसिक मनोविज्ञान विभाग और राज्य फिंगर प्रिंट ब्यूरो शामिल हैं।

एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, फाॅरेंसिक सेवा निदेशालय के अंतर्गत राज्य फिंगर प्रिंट ब्यूरो को 2024 में नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (एनएबीएल) मान्यता प्राप्त हुई, जिससे यह भारत का पहला मान्यता प्राप्त फिंगर प्रिंट ब्यूरो बन गया।

निरंतर मान्यता के साथ, राज्य फाॅरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने अपनी यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है।

राज्य फाॅरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला का मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया गया है।

नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज से मान्यता प्राप्त होने के साथ, प्रयोगशाला द्वारा तैयार की गई रिपोर्टों को व्यापक स्वीकृति मिलती है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में मान्यता भी शामिल है।

इससे फॉरेंसिक सबूतों की विश्वसनीयता में काफी बढ़ोतरी होने और आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि की दर बेहतर होने की उम्मीद है।

एन.ए.बी.एल. से मान्यता प्राप्त रिपोर्टों का साक्ष्य के तौर पर ज्यादा महत्व होता है और न्याय व्यवस्था में उन्हें उचित महत्व दिया जाता है।

डॉ. मीनाक्षी महाजन ने कहा कि मौजूदा हालात में, पूरे भारत में फॉरेंसिक प्रयोगशालाएँ नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज द्वारा तय किए गए मानकों को तेजी से अपना रही हैं, जिससे वैश्विक मानकों के अनुरूप तकनीकी दक्षता सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है।

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