हिमाचल में विकास की नहीं, एफआईआर दर्ज करने की प्रतिस्पर्धा, कांग्रेस सरकार प्रतिशोध की राजनीति करे बंद : संदीपनी भारद्वाज

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शिमला। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में इन दिनों विकास कार्यों की प्रतिस्पर्धा के बजाय एफआईआर और मुकदमे दर्ज करने की प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारद्वाज ने कहा कि इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में हुई और भाजपा के प्रदेश नेतृत्व, पूर्व मंत्रियों, विधायकों तथा कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न मामलों में लगातार एफआईआर दर्ज होने को लेकर पार्टी पहले भी सवाल उठाती रही है। अब ऊना जिले में हुई पुलिस कार्रवाइयों को लेकर भी भाजपा कार्यकर्ताओं में गंभीर चिंता है।

उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के गृह जिले ऊना में भाजपा से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों और कानूनी कार्रवाइयों की निष्पक्षता पर पार्टी सवाल उठा रही है।

यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई वास्तविक कानूनी मामला है तो कानून को निष्पक्ष रूप से अपना काम करना चाहिए, लेकिन पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल किसी राजनीतिक विरोधी को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए।

भारद्वाज ने कहा, “लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना अपराध नहीं है। विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और जनता की आवाज उठाना है। यदि हर राजनीतिक विरोध, प्रदर्शन या आलोचना का जवाब एफआईआर से दिया जाएगा तो यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा नहीं कही जा सकती।”

उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह बनती दिखाई दे रही है कि पहले मुख्यमंत्री पर भाजपा नेताओं के खिलाफ मामलों को लेकर सवाल उठे और अब उपमुख्यमंत्री के क्षेत्र में भी भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।

यदि यही क्रम आगे बढ़ा और सरकार के मंत्री भी राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ मुकदमों की होड़ में शामिल हो गए तो हिमाचल की पहचान विकास के बजाय “एफआईआर वाले प्रदेश” के रूप में बनने का खतरा है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हिमाचल की जनता ने सरकार को रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास के लिए जनादेश दिया है, राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाने के लिए नहीं।

उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और किसी भी मामले में कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर होनी चाहिए, राजनीतिक पहचान के आधार पर नहीं।

भारद्वाज ने मांग की कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से जुड़े राजनीतिक रूप से विवादित मामलों में सरकार पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करे और पुलिस प्रशासन को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से कार्य करने दे।

उन्होंने कहा कि “कांग्रेस सरकार एफआईआर की राजनीति छोड़कर विकास की राजनीति करे। लोकतंत्र में राजनीतिक लड़ाई विचारों और जनता के बीच लड़ी जाती है, पुलिस थानों और मुकदमों के सहारे नहीं।”

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