महिलाओं ने बुरांस से जूस, जैम तथा स्क्वैश तैयार कर कमाए एक लाख 26 हजार

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नेरवा, नोविता सूद। अब वह समय नहीं रहा जब महिलायें सिर्फ चूल्हे चौके तक ही सिमित होती थी । आज के दौर में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर कठिन से कथिकारी को अंजाम सेकर अपने आप को साबित कर रही हैं।

विकास खंड कुपवी के दुर्गम पंचायत मझौली और बांदल कफलाह की स्वयं सहायता समूहों से जुडी महिलाओं ने भी ऐसा ही कुछ कर दिखाया है। इन महिलाओं ने जंगलों में कुदरती रूप से उगने वाले औषधीय फूल बुरांस से तैयार जूस, जैम तथा स्क्वैश आदि विभिन्न उत्पाद तैयार कर अब तक एक लाख 26 हजार की आमदनी कर ग्रामीण परिवेश में रह रही महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम की है।

मजे की बात यह है कि इस कार्य में फूलों को खतरनाक पेड़ों पर चढ़ कर तोड़ने से लेकर उत्पाद तैयार करने तक के सारे कार्य इन महिलाओं ने स्वयं अंजाम दिए है।

खंड विकास अधिकारी कुपवी विनीत ठाकुर ने बताया कि विकास खंड कुपवी की मझौली एवं बांदल कफलाह पंचायत की करीब दस स्वयं सहायता समूह डोबा, शिव शंकर एवं शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह शिवद्वार की करीब अढ़ाई दर्जन महिलाओं ने हिमाचल प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गत वर्ष से इस कार्य को छोटे स्तर से शुरू किया था।

इस कार्य को छह सात महिलायें पूरी सक्रियता से लगातार कर रही हैं। इन महिलाओं ने इस कार्य को इतनी शिद्दत से अंजाम दिया है कि उनकी मेहनत के परिणाम से हर कोई चकित है। इन महिलाओं ने एक साल में महज एक दो महीने मेहनत कर सवा लाख रुपये से ज्यादा कमाई कर साबित कर दिया है कि औरत महज चूल्हे चौके तक ही सीमित नहीं है।

बहरहाल दुर्गम क्षेत्र से सम्बन्ध रखने वाली इन महिलाओं ने जो कार्य किया है उस पर ‘बिजली चमकती है तो आकाश बदल देती है, आंधी उठती है तो दिन और रात बदल देती है, जब गरजती है नारी शक्ति तो इतिहास बदल देती है’ यह पंक्तियाँ पूरी तरह फिट बैठती हैं।

उधर बीडीओ कुपवी विनीत ठाकुर ने बताया कि अपनी इस सफलता से यह नारी शक्ति इतनी उत्साहित हो उठी है कि जहां इन्होंने आने वाले समय में अपने लक्ष्य को दोगुना तक करने का प्रण भी ले लिया है वहीँ अन्य महिलायें भी इनसे प्रेरित हो रही हैं।

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