शिमला। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता हासिल करने के कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के प्रयास सफल नहीं हो पाए हैं, जिसके कारण उनमें निराशा और हताशा है। अब पूरे देश में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास और अराजकता का वातावरण खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि एक तरफ कांग्रेस नेता हाथ में संविधान की किताब लेकर देशभर में घूमते हैं और संविधान के प्रति श्रद्धा और सम्मान की बात करते हैं, दूसरी तरफ चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ देश और विदेश में बेबुनियाद आरोप लगाते हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और मर्यादा का सम्मान प्रत्येक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि आजकल वे पीपीटी के माध्यम से प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और अपनी बात को इस प्रकार प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं जैसे वही अंतिम सत्य हो। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने मात्र से कोई बात सत्य नहीं हो जाती, तथ्यों को भी सामने रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की बैठक के बाद तीनों चुनाव आयुक्तों की ओर से सामने आई स्थिति ने कई बातों को स्पष्ट कर दिया है। जयराम ठाकुर के अनुसार, जिस पत्र का उल्लेख किया जा रहा है, वह कैबिनेट सचिव को भेजा गया था और उसका चुनाव आयोग के किसी नीतिगत विषय अथवा SIR से संबंध नहीं था, बल्कि वह प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित था।
उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में कोई dissenting note होता तो वह रिकॉर्ड का हिस्सा होता। तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में निर्णय बहुमत से होता है। ऐसे में जो विषय हुआ ही नहीं, उसे विवाद बनाकर प्रस्तुत करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
जयराम ठाकुर ने चुनाव आयोग के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल के इतिहास को भी देखना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के समय पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों के कार्यकाल का उल्लेख किया।
उन्होंने विशेष रूप से एम एस गिल का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए, राज्यसभा गए और केंद्र में मंत्री भी बने। जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस आज चुनाव आयोग पर जिस तरह सवाल उठा रही है, उसे अपने राजनीतिक इतिहास को भी याद रखना चाहिए।
उन्होंने पुराने दौर में बूथ कैप्चरिंग और मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक न पहुंचने देने जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने चुनावी प्रक्रिया का वह दौर भी देखा है। आज मतदाता स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करके सरकार चुनता है।
जयराम ठाकुर ने कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ के आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस कई राज्यों में दशकों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या वहां भी कांग्रेस इतने वर्षों से अपनी पराजय को ‘वोट चोरी’ से जोड़ेगी?
जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी, वहां चुनाव आयोग ठीक है और जहां कांग्रेस हारती है वहां चुनाव आयोग पर आरोप लगाना शुरू कर दिया जाता है।”
जयराम ठाकुर ने हिमाचल में चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर हुए कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर जाकर बोर्ड पर कालिख पोतें, पुतले को लात और जूते मारें और चुनाव आयोग को आग लगाने जैसी भाषा का प्रयोग हो, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं का ऐसा व्यवहार उनकी हताशा को प्रदर्शित करता है। जिस चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश में चुनाव करवाए और जिसके परिणाम के आधार पर कांग्रेस की सरकार बनी, उसी संवैधानिक संस्था का सत्ता में रहते हुए अपमान करना कांग्रेस के दोहरे चरित्र को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस के आरोपों का जवाब जनता के बीच लोकतांत्रिक तरीके से देगी। उन्होंने कहा, “हम लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में पूर्ण विश्वास रखते हैं। कांग्रेस की हताशा और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ खड़ा किए जा रहे भ्रम को जनता के सामने तथ्यों के साथ उजागर करना भाजपा का दायित्व है और हम यह काम पूरी मजबूती से करेंगे।
