करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी देने के मामलों पर जल्द फैसला लेने का किया आग्रह

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शिमला। हिमाचल में करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी देने के मामलों पर अभी सरकार कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाई है जबकि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में करुणामूलक के करीब 4500 से ज्यादा मामले पहुंचे हैं।।

राकेश कुमार, विक्की ठाकुर, सतीश ठाकुर, संतोष कुमार, धीरज आनंद, विनोद धीमान व शेखर चन्देल की माने तो कई प्रभावित परिवार करीब 15 साल से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।

करुणामूलक नौकरी के लिए आय सीमा 2.50 लाख रुपए सालाना करने की नई शर्त भी राहत नहीं दे पाई है।।

उन्होंने कहा कि सरकार ने विभिन्न विभागों से करुणामूलक आधार पर नौकरी देने के लंबित मामलों की डिटेल मांगी थी और सभी विभागों से इस संबंध में जानकारी सरकार के पास पहुंच गई है।

बावजूद इसके इस दिशा में सरकार अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं ले सकी है, क्योंकि वर्तमान में पांच फीसदी कोटा करुणामूलक नौकरी के लिए रखा गया है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि 5 फीसदी कोटा खत्म किया जाए।

उनके अनुसार कई विभागों में कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने के बाद आश्रित परिवार की महिला ने बच्चे छोटे होने के कारण करुणामूलक नौकरी नहीं ली थी।

अब जब बच्चे नौकरी योग्य हुए तो उन्हें आय सीमा के कारण नौकरी नहीं मिल रही है। हालांकि, अब सरकार ने आय सीमा 2.50 लाख रुपये कर दी है, लेकिन अब भी नौकरी नहीं मिल पाई है।

राकेश कुमार,विक्की ठाकुर, सतीश ठाकुर, संतोष कुमार,धीरज आनंद, विनोद धीमान व शेखर चन्देल ने सरकार से यह गुजारिश कि है कि इनकम का क्राइटेरिया हटा दिया जाए और साथ ही पारिवारिक पेंशन काउंट ना की जाए, ताकि आश्रितों को नौकरी मिल सके।

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