विकसित भारत के निर्माण में शिक्षण संस्थानों की महत्त्वपूर्ण भूमिका : राज्यपाल

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शिमला। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने शुक्रवार कल भारतीय प्रबंधन संस्थान जम्मू (आईआईएम जम्मू) से प्रबंधन शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र के रूप में उभरने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि संस्थान को जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ व्यापक हिमालयी क्षेत्र की विकास संबंधी चुनौतियों और संभावनाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

राज्यपाल ने आईआईएम जम्मू के 10वें स्थापना वर्ष समारोह को संबोधित करते हुए संस्थान के शिक्षकों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों, कर्मचारियों और शासी निकाय को बधाई दी।

उन्होंने संस्थान की एक दशक लंबी यात्रा को ‘प्रेरणादायक’ बताते हुए कहा कि वर्ष 2016 में 56 विद्यार्थियों के पहले बैच से शुरू हुए इस संस्थान में आज 1,400 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

यह संस्थान की बढ़ती शैक्षणिक प्रतिष्ठा और प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं के लिए बढ़ते अवसरों को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि आईआईएम जम्मू जैसे संस्थानों का विस्तार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में उच्च शिक्षा के सुदृढ़िकरण और ऐसे संस्थानों के निर्माण को दिए जा रहे महत्व को भी दर्शाता है, जो राष्ट्र के विकास में प्रभावी योगदान दे सकें।

गुप्ता ने नेतृत्व और प्रबंधन के बदलते स्वरूप पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों का समाधान अब किसी एक विषय की सीमाओं में रहकर नहीं किया जा सकता।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक बहुविषयकता, अनुसंधान, नवाचार और रचनात्मकता की दिशा में परिवर्तित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सफल पेशेवर तैयार करना नहीं होना चाहिए, बल्कि जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता तैयार करना भी होना चाहिए। उन्होंने प्रबंधन शिक्षा में मूल्यों और चरित्र निर्माण के महत्व पर भी बल दिया।

कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि एआई, ऑटोमेशन, डेटा और उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास से व्यवसाय और रोजगार के स्वरूप में व्यापक बदलाव आ रहा है। ऐसे बदलते परिवेश में केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा।

भविष्य के नेतृत्व की गुणवत्ता तय करने में रचनात्मकता, जिज्ञासा, नेतृत्व क्षमता, सही निर्णय लेने की क्षमता, साहस, संवेदनशीलता और नैतिक निर्णय लेने की क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी डिग्री को शिक्षा की अंतिम मंजिल न मानते हुए इसे जीवनभर सीखने की यात्रा की शुरुआत के रूप में देखने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने संस्थान से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और व्यापक हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों पर अधिक शोध करने तथा ऐसी नीतिगत और प्रबंधकीय समाधान विकसित करने का आग्रह किया, जिन्हें देश के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी लागू किया जा सके।

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