टांडा मेडिकल कॉलेज की बदहाली चरम पर, वेटिंग, अव्यवस्था और सुविधाओं की कमी से मरीज बेहाल : पवन काजल

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शिमला। भाजपा नेता एवं विधायक पवन काजल ने विधानसभा में मांग संख्या 9 (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) पर चर्चा के दौरान प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान टांडा मेडिकल कॉलेज आज बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है, जहां मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

काजल ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में रोजाना 2000 से 2500 मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन स्थिति यह है कि CT स्कैन के लिए 2 महीने, MRI के लिए 3 महीने और अल्ट्रासाउंड के लिए 1 महीने तक की वेटिंग चल रही है।

उन्होंने कहा कि मजबूरी में गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के लिए जाना पड़ रहा है, जहां उनसे लाखों रुपये तक वसूले जा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल की चारों लिफ्टें महीनों से खराब हैं, मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है, वहीं कई मरीजों के परिजन ठंड में अस्पताल के फर्श पर रात बिताने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए शर्मनाक है।

पवन काजल ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में पार्किंग की कोई उचित व्यवस्था नहीं है, जबकि हजारों मरीज रोजाना यहां आते हैं। साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने के कारण हड़ताल जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और प्रभावित हो रही हैं।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ मामलों में सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर कर रहे हैं, जहां उन्हीं डॉक्टरों द्वारा महंगे ऑपरेशन किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

हिमकेयर योजना का समर्थन करते हुए काजल ने कहा कि यह योजना गरीब और आम आदमी के लिए “संजीवनी बूटी” है, लेकिन सरकार इसे बदनाम कर बंद करने की साजिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, न कि पूरी योजना को समाप्त किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई अस्पतालों में डॉक्टर होने के बावजूद न तो उपकरण हैं और न ही ऑपरेशन थिएटर की सुविधा, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो रही हैं। कांगड़ा और अन्य क्षेत्रों में स्वास्थ्य संस्थानों की बदहाल स्थिति का भी उन्होंने उल्लेख किया।

काजल ने विधायक निधि में कटौती को भी जनविरोधी बताते हुए कहा कि इससे विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के प्रयास प्रभावित होंगे।

उन्होंने प्रदेश में दवाइयों के सैंपल फेल होने के मामलों पर भी चिंता जताते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है और सरकार को इसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए।

अंत में पवन काजल ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे करने के बजाय जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने पर ध्यान दे, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को समय पर और सस्ती चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।

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