शिमला। 24 अप्रैल को स्थानीय निधि लेखा समिति की बैठक हिमाचल प्रदेश विधान सभा के मुख्य समिति कक्ष में समिति के सभापति संजय रत्न की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। जिसमें समिति सदस्य संजय अवस्थी, मलेन्द्र राजन तथा कुलदीप सिंह राठौर ने भाग लिया।
समिति ने बैठक के दौरान पंचायती राज संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों से सम्बन्घित लंबित लेखा आपत्तियों, अनियमित व्ययों की वसूली तथा समिति की संस्तुतियों में हो रही देरी पर गम्भीर चिंता व्यक्त की।
समिति ने पाया कि 31 मार्च 2025 तक 50.68 करोड़ की राशि वसूली योग्य थी जिसमें 31 दिसंबर 2025 तक नौ माह की अवधि में मात्र 2.09 करोड़ की राशि की वसूली / समायोजन किया जा सका, जबकि 48.58 करोड़ की राशि अब भी शेष है। समिति ने इसे असंतोषजनक बताते हुए नाराजगी व्यक्त की।
समिति ने इस संदर्भ में सरकार को आवश्यक दिशा- निर्देश जारी करने का निर्णय लिया जिसमें जिन व्यक्तियों के विरूद्व लेखा परीक्षण टिप्पणीयों में देय राशि लंबित है, उन्हें राशि की पूर्ण वसूली तक चुनाव लड़ने के लिए एन ओ सी प्रमाण पत्र जारी न किया जाए।
समिति ने अपने समक्ष लंबित मामलों की भी समीक्षा की तथा सभी विभागों को निर्देश दिए कि समिति की संस्तुतियों पर की गई कार्यवाही की अद्यतन सूचना निर्धारित अवधि में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।
स्थानीय निधि लेखा समिति ने विभिन्न विषयों पर 26 मई को मुख्य सचिव का मौखिक साक्ष्य करने का निर्णय भी लिया।
