प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत के तहत प्रदेश स्तरीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पहल
शिमला। शहरी विकास एवं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज शहरी विकास विभाग और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के संयुक्त तत्वावधान में परियोजना ‘सर्कुलर भारत’ के तहत आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की क्षमता बढ़ाना तथा अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समावेशी और पर्यावरण अनुकूल बनाना है।

इस अवसर पर शहरी विकास मंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ती कचरे की समस्या के समाधान के लिए जनभागीदारी, प्रभावी जन-जागरूकता और कचरे के स्रोत पर पृथक्करण आवश्यक है।
किसी भी योजना की सफलता तभी सुनिश्चित होती है, जब जमीनी स्तर पर उससे जुड़े सभी हितधारक पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें।
उन्होंने सफाई कर्मचारियों के सम्मान, स्वाभिमान एवं सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने तथा घरों और समुदायों में व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्रित करने की आदत विकसित करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में कचरे के निस्तारण के लिए भूमि की सीमित उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए अगले 20 से 25 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार करना, आधुनिक तकनीकों को अपनाना तथा कचरे के पुनः उपयोग एवं पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना आवश्यक है।
उन्होंने प्लास्टिक कचरे के बेहतर उपयोग की संभावनाओं पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड और संबंधित संस्थाओं की इस पहल के तहत पहले कुछ चयनित क्षेत्रों में पायलट परियोजनाएं शुरू की जानी चाहिए, ताकि प्रभावी कार्यप्रणाली विकसित कर उसके सकारात्मक परिणामों के आधार पर विस्तार किया जा सके।
निदेशक, शहरी विकास, नीरज कुमार ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों के नेतृत्व एवं संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करना, अपशिष्ट प्रबंधन के व्यावहारिक समाधानों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
इसके तहत स्रोत पर कचरे का पृथक्करण, परिवहन एवं प्रसंस्करण, व्यवहार परिवर्तन, संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण तथा मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) के प्रभावी संचालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
परियोजना के तहत सर्कुलर इकोनॉमी और रिसोर्स रिकवरी के क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध करवाने के साथ-साथ प्रशिक्षण आवश्यकताओं का आकलन, क्षमता संवर्धन कार्यशालाएं, तकनीकी सहयोग और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसमें कचरे के उत्पादन में कमी, स्रोत पर पृथक्करण, संग्रहण एवं प्रसंस्करण, संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, पुनर्चक्रण तथा मौजूदा अपशिष्ट प्रबंधन अधोसंरचना के बेहतर उपयोग पर विशेष बल दिया जाएगा।
