शिमला। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रूड़की में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विजन 2047- समृद्ध एवं महान भारत 2.0 का उद्घाटन किया।
यह सम्मेलन स्वदेशी शोध संस्थान के सहयोग से आयोजित किया गया। राज्यपाल इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जहां देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में विचार-विमर्श किया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने भारत की तीव्र विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समन्वित नीतिगत ढांचे, नवाचार और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
अपने दौरे के दौरान, राज्यपाल ने संस्थान की इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रयोगशाला का निरीक्षण किया, जहां उन्होंने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सतत् परिवहन से संबंधित अत्याधुनिक उपकरणों और अनुसंधान सुविधाओं का अवलोकन किया।
उन्होंने पर्यावरण अनुकूल और तकनीकी रूप से उन्नत गतिशीलता समाधान विकसित करने में शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर राज्यपाल को दिव्यांगजनों के लिए विकसित एक अभिनव एक्सेसिबल मोबिलिटी व्हीकल प्रस्तुत किया गया, जिसे याली मोबिलिटी, आरती फाउंडेशन, मिनिस्टरी ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज़ तथा अंतर्राष्ट्रीय ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी केंद्र के सहयोग से विकसित किया गया है।
यह वाहन समावेशी डिजाइन और तकनीकी नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों की गतिशीलता को सुदृढ़ बनाना है। राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार के नवाचार सामाजिक समावेशन, सतत विकास और सुगम्यता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा ने सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।
संस्थान के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के निर्माण में शिक्षण संस्थानों, शासन और उद्योग जगत के बीच सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विषय-प्रस्तुति देते हुए राष्ट्रीय विकास, नवाचार और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की एक प्रमुख उपलब्धि राष्ट्रीय रोजगार नीति का शुभारंभ रहा, जो रोजगार सृजन और आर्थिक सुदृढ़ता की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है।
इस सम्मेलन में देश और विदेश के 100 से अधिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जहां समावेशी आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार, रोजगार सृजन, सतत विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित प्रदर्शनी में विभिन्न स्टार्टअप्स ने अत्याधुनिक तकनीकों और नवाचार आधारित समाधानों का प्रदर्शन किया, जो नवाचार-आधारित विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
