शिमला। हिमाचल में पंचायतों, नगर पंचायतों व नगम निगमों का पुनर्गठन अब नगर निकाय चुनावों की प्रक्रिया खत्म होने तक नहीं हो पाएगा। चुनाव आयोग ने इस बाबत आज अधिसूचना जारी कर दी है।
अधिसूचना के अनुसार इस अधिसूचना के जारी होने के बाद चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक, पंचायतों और नगर पालिकाओं की संरचना, वर्गीकरण या क्षेत्र में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
अधिसूचना में कहा गया कि पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 31 जनवरी, 2026, 50 शहरी स्थानीय निकायों का 18 जनवरी, 2026, 4 नगर निगम (धर्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन) का 13 अप्रैल, 2026 और 5 नगर पंचायतों (अंब, चिरगाँव, कंडाघाट, नेरवा और निरमंड) का कार्यकाल 16 अप्रैल, 2026 को समाप्त हो रहा है।
3577 ग्राम पंचायतों, 90 पंचायत समितियों, 11 जिला परिषदों और 71 शहरी स्थानीय निकायों के संबंध में पंचायती राज संस्थाओं का परिसीमन पूरा हो चुका है और अंतिम रूप से अधिसूचित हो चुका है।
अधिसूचना के अनुसार भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने “पंजाब राज्य एवं अन्य बनाम बेसार्ट कुमार एवं अन्य” शीर्षक वाली विशेष अनुमति याचिका संख्या 22468, 22469/2024 में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार चुनाव प्रक्रिया भारत के संविधान के अनुच्छेद 243ई(1) और 243एलआई(1) के तहत परिकल्पित पाँच वर्ष की अवधि की समाप्ति से छह महीने पहले शुरू होनी चाहिए।
राज्य चुनाव आयोग ने 1 मई, 2025, 4 जुलाई, 2025 और 28 जुलाई, 2025 के पत्रों द्वारा हिमाचल प्रदेश सरकार को सूचित किया था। वार्डों के परिसीमन की अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद शहरी स्थानीय निकायों की सीमाएँ स्थिर हो जाएँगी।
और चूँकि पंचायती राज संस्थाओं के गठन के लिए शेष समय 75 दिनों से कम है और अधिकांश शहरी स्थानीय निकायों के लिए लगभग 60 दिन है इसलिए यह अधिसूचना जारी कर दी गई है।
