नशा मुक्त भारत-2029 का रोडमैप देश के युवाओं के भविष्य को बचाने का राष्ट्रीय संकल्प : राजेंद्र राणा

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हिमाचल में भी केंद्र की नीति लागू हो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की स्थापना के लिए अमित शाह को सौंपेंगे ज्ञापन

धर्मशाला। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा प्रस्तुत “नशा मुक्त भारत-2029” का रोडमैप केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि देश की युवा पीढ़ी को नशे के अभिशाप से बचाने का राष्ट्रीय संकल्प है।

उन्होंने कहा कि पहली बार केंद्र सरकार ने नशे के विरुद्ध पूरे देश के लिए इतनी व्यापक, वैज्ञानिक और बहुआयामी रणनीति तैयार की है, जिसमें ड्रग माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी, ड्रग-फ्री कैंपस, पुनर्वास व्यवस्था, वित्तीय जांच, अंतरराज्यीय समन्वय और जनभागीदारी जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्राथमिकता दी गई है।

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “नशा मुक्त भारत” विज़न को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

राजेंद्र राणा ने कहा कि केंद्र सरकार ने यह अभियान किसी एक राज्य या क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए तैयार किया है। यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य और राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है।

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई केवल कानून के बल पर नहीं, बल्कि समाज, परिवार, शिक्षा संस्थानों और सरकारों की संयुक्त भागीदारी से ही जीती जा सकती है। केंद्र सरकार ने इसके लिए स्पष्ट दिशा और रोडमैप दोनों उपलब्ध करा दिए हैं।

26 जून को विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिवों एवं वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि आतंकवाद के साथ-साथ नशे के विरुद्ध लड़ाई भी राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।

यह स्पष्ट किया गया कि नशे का कारोबार केवल युवाओं का भविष्य नहीं छीनता, बल्कि आतंकवाद और संगठित अपराध को आर्थिक मजबूती भी देता है।

इसलिए आतंकवाद और नशे, दोनों के खिलाफ समान दृढ़ता, समन्वय और राष्ट्रीय संकल्प के साथ निर्णायक कार्रवाई समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

राजेंद्र राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह केंद्र सरकार की इस नीति को पूरी गंभीरता के साथ अपनाए और “नशा मुक्त भारत-2029” के रोडमैप को प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू करे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में भी उसी मॉडल पर जनजागरूकता, रोकथाम, पुनर्वास और सख्त प्रवर्तन की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, ताकि हिमाचल को नशे की बढ़ती चुनौती से समय रहते बचाया जा सके।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हाल के समय में हिमाचल प्रदेश के कुछ प्रशासनिक अधिकारियों तथा पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों के नाम भी नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में सामने आए हैं।

यह अत्यंत गंभीर विषय है। जब कानून लागू करवाने वाली व्यवस्था के भीतर से ही ऐसे मामले सामने आएं, तो आम जनता तक नशा पहुंचने से रोकना और कठिन हो जाता है।

ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई आवश्यक है, ताकि जनता का विश्वास कायम रहे और नशा तस्करों को किसी भी स्तर पर संरक्षण न मिल सके।

राजेंद्र राणा ने कहा कि वे शीघ्र ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन सौंपेंगे, जिसमें हिमाचल प्रदेश में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की एक विशेष इकाई अथवा क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने का आग्रह किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इससे अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क पर तेज़ी से कार्रवाई, बेहतर खुफिया समन्वय और नशा तस्करों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

राजेंद्र राणा ने कहा कि “हमें बीमारी से लड़ना है, बीमार से नहीं। नशे का शिकार हुआ युवा हमारा अपना है। उसे उपचार, परामर्श, शिक्षा और रोजगार देकर मुख्यधारा में वापस लाना ही इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता होगी।”

उन्होंने प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, महिला मंडलों, युवा मंडलों और अभिभावकों से आह्वान किया कि वे राजनीति से ऊपर उठकर “नशा मुक्त हिमाचल एवं भारत ” को जनआंदोलन बनाएं।

उन्होंने कहा कि “नशा मुक्त युवा ही विकसित हिमाचल और विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव हैं।”

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