शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने एक प्रैस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की चौदहवीं विधानसभा का 12वां सत्र 21 अगस्त से 3 सितम्बर तक आयोजित किया जाएगा।
पहले दिन पूर्व विधायक स्वर्गीय विजेन्द्र सिंह तथा राम चन्द भाटिया के प्रति शोकोदगार होंगे। 27 अगस्त का दिन गैर-सरकारी सदस्य कार्य दिवस के लिए निर्धारित किया गया है।
पठानिया ने कहा कि इस बर्ष बजट सत्र में 16 बैठकें आयोजित की गईं थीं और इस सत्र में 10 बैठकें आयोजित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि इस सत्र में सदस्यों से कुल 1036 प्रश्न प्राप्त हुए हैं जिसमें 787 प्रश्न तारांकित तथा 249 प्रश्न अतारांकित हैं। यह सभी सूचनाएं ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हुई हैं जिन्हें सरकार को आगामी कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सदस्यों द्वारा प्रश्नों से सम्बंधित सूचनाएं भेजने का समय 18 अगस्त को शाम 5 बजे तक निर्धारित था।
इसके अतिरिक्त नियम 62 के तहत 13 सूचनाएं, नियम 63 के तहत 2 सूचनाएं, नियम 101 के अन्तर्गत 5 सूचनाएं, नियम 130 के तहत 15 सूचनाएं सदस्यों से प्राप्त हुई हैं जिन्हें भी आगामी कार्रवाई के लिए सरकार को भेज दिया गया है।
पठानिया ने कहा कि सदस्यों से जो सूचनाएं प्रश्नों के माध्यम से प्राप्त हुई हैं वह मुख्यत: आपदा से निपटने के लिए केन्द्र से सहायता राशि, बाढ़, स्कूलों का विलय, प्रदेश में हाल ही में भारी वर्षा तथा प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न हुई स्थिति, सरकार द्वारा आपदा से निपटने के लिए किए गए प्रयास, सड़कों, पुलों का निर्माण, स्वीकृत सड़कों की DPR’s, प्रदेश में महाविद्यालयों, स्कूलों, स्वास्थ्य संस्थानों इत्यादि का उन्नयन, विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की पदपूर्ति, पर्यटन, उद्यान, पेयजल की आपूर्ति, युवाओं में बढ़ते नशे के प्रयोग की रोकथाम, बढ़ते अपराधिक मामलों तथा परिवहन व्यवस्था पर आधारित हैं।
इसके साथ ही सदस्यों ने प्रश्नों के माध्यम से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से सम्बन्धित मुख्य मुद्दों को भी उजागर किया है।
पठानिया ने कहा कि कल 4:30 बजे दोनों दलों के प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई गयी है जिसमें संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया तथा भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक सुखराम चौधरी भी शामिल होंगे।
उन्होंने सत्ता पक्ष तथा प्रतिपक्ष से अनुरोध किया कि वह उन्हें सदन संचालन में रचनात्मक सहयोग दें ताकि सदन के समय का सदुपयोग जनहित से जुडे मुद्दों व सार्थक चर्चा के लिए किया जा सके।
