2030 में हिमाचल स्वास्थ्य क्षेत्र में देश में होगा नंबर वन : सीएम सुक्खू

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शिमला। सीएम सुक्खू ने एक प्रैस वार्ता में कहा कि प्रदेश सरकार का तीन वर्ष 10 महीने का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। सरकार ने पहले दिन से ही स्पष्ट किया था कि वह सत्ता के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए आई है।

व्यवस्था परिवर्तन के तहत किए गए कार्यों का परिणाम है कि हिमाचल प्रदेश कुछ क्षेत्रों में देशभर में अग्रणी स्थान हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिना किसी मांग के एक सोच के साथ योजनाओं को धरातल पर उतारना ही व्यवस्था परिवर्तन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सत्ता संभालने के बाद पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। इनमें स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना, सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और आर्थिक सुधार करना शामिल है।

प्रदेश की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उनकी सरकार सत्ता में आई, उस समय हिमाचल प्रदेश पर 76,633 करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके अतिरिक्त सरकारी कर्मचारियों की लगभग 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां थीं। वहीं आज प्रदेश पर 99564 करोड़ का कर्ज है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्ज को लेकर भाजपा दुष्प्रचार कर रही है जबकि असलियत में भाजपा के पांच वर्ष के कार्यकाल में 43261 करोड़ का कर्ज लिया गया जबकि वर्तमान सरकार ने 22 अक्टूबर 2026 तक 37781 करोड़ का ही कर्ज लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उन्होंने सत्ता संभाली तो आर्थिक स्थिति का आकलन करने के दौरान यह सामने आया कि खजाना लगभग खाली है। जीएसटी लागू होने से पहले प्रदेश को वैट और आबकारी कर के रूप में हर साल लगभग 4,000 करोड़ रुपये प्राप्त होते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने आर्थिक सुधारों की दिशा में कदम उठाए और कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इनमें से कुछ फैसलों का विरोध भी हुआ।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश की जनता और कर्मचारी वर्ग का आभार व्यक्त किया कि जब भी कर्मचारी अपनी बात रखने के लिए सरकार के पास आए, उन्हें आर्थिक परिस्थितियों और सरकार के फैसलों के पीछे के कारणों को समझाया गया।

कर्मचारियों ने भी सरकार की बात को समझा और सहयोग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इन फैसलों के सार्थक परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में ओपीएस जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार कर्मचारियों, किसानों और बागवानों को परेशान करने या युवाओं के रोजगार के अवसरों को बंद करने के उद्देश्य से फैसले नहीं लेती। सरकार का उद्देश्य हमेशा प्रदेश का विकास करना और जनता के हित में काम करना होता है।

उन्होंने कहा कि सरकारों को पांच वर्ष बाद जनता की अदालत में जाना पड़ता है, इसलिए जनहित में अच्छे कार्य करना उनकी प्राथमिकता रहती है। हालांकि, प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई बार कठोर फैसले लेने पड़ते हैं और ऐसे फैसलों को विरोध का सामना भी करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल के मेडिकल कॉलेजों में 35 से बढ़कर 60 प्रतिशत स्टाफ की उपलब्धता हो गयी है।सरकार ने 31 मार्च 2027 तक मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की नियुक्तियां पूरी करने और वर्ष 2027 तक कर्मचारियों की उपलब्धता 70 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

सरकार के अनुसार, आईजीएमसी में कई एक्स-रे मशीनें 10 से 12 वर्ष पुरानी थीं, जबकि एमआरआई मशीन लगभग 19 वर्ष पुरानी थी, जिन्हें सिलसिलेवार बदला जा रहा है। वहीं सरकार ने रोग की समय पर पहचान यानी डायग्नोस्टिक सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

इसी दिशा में आईजीएमसी चमियाना, नेरचौक और हमीरपुर सहित प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में आधुनिक एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और 3 टेस्ला एमआरआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अब जांच सुविधाओं में प्रतीक्षा समय कम करने की दिशा में भी काम कर रही है। उद्देश्य यह है कि मरीजों की बीमारी का समय पर पता चल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के तहत प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा किफायती दरों पर उपलब्ध करवाई गई है। अब तक लगभग 600 से 700 रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। इनमें अकेले चमियाना में करीब 314 रोबोटिक सर्जरी शामिल हैं।

सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया को भी गति दी है। मेडिकल कॉलेजों में लगभग 1000 स्टाफ नर्सों की भर्ती की गई है और रेडियोग्राफर के सभी पद भर दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए सरकार मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक ऑटोमेशन लैब स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए दिल्ली स्थित एम्स में उपलब्ध तकनीक का अध्ययन किया गया है। ऑटोमेशन लैब के माध्यम से विभिन्न जांच प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

सुक्खू ने कहा कि मेडिकल क्षेत्र में प्रदेश में पिछले लगभग 40 वर्षों से पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) की सीटों की संख्या में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई थी। पहले पीजी की 277 सीटें थीं। अब 320 अतिरिक्त सीटों को केंद्र सरकार से मंजूरी मिली है।

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