शिमला। हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक टोपी में मोनाल पक्षी की कलगी के उपयोग से इस सुंदर एवं संरक्षित पक्षी पर पड़ रहे खतरे को देखते हुए प्रसिद्ध हिमाचली लोक गायक इन्द्र जीत ने एक सराहनीय पहल की।
इसके तहत उन्होंने मोनाल की वास्तविक कलगी के स्थान पर चाँदी से बनी कृत्रिम कलगी के उपयोग को बढ़ावा दिया, जिससे वन्यजीव संरक्षण को समर्थन मिला।
इस अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में उनके गीत “पाखली माणु” की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस गीत के माध्यम से लोक गायक इन्द्र जीत ने मोनाल पक्षी की असली कलगी के स्थान पर कृत्रिम कलगी को अपनाने का संदेश दिया, जो लोगों के दिलों को छू गया।
इस संदेश को व्यापक जनसमर्थन मिला और लाखों लोगों ने कृत्रिम कलगी को अपनाया तथा उसे काफी पसंद किया। इसका प्रभाव इतना व्यापक रहा कि हिमाचल प्रदेश के बाहर भी कृत्रिम कलगी का चलन (ट्रेंड) देखने को मिला।
इस गीत को यूट्यूब पर लगभग 1.34 करोड़ से अधिक व्यूज़ प्राप्त हुए, जिससे यह संदेश व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचा।
इस पहल के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में युवाओं ने पारंपरिक टोपियों में कृत्रिम कलगी को अपनाना शुरू किया, जिससे मोनाल पक्षी के संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिली।
इन्द्र जीत को इस सराहनीय कार्य के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग की ओर से प्रशंसा पत्र भी प्रदान किया गया है।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के प्रसिद्ध लोक गायक इन्द्र जीत ने राज्य की लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
बिना किसी औपचारिक संगीत प्रशिक्षण के भी उन्होंने अपने लोक गीतों के माध्यम से हिमाचली परंपराओं, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य यंत्रों और पहाड़ी जीवन शैली को व्यापक जनमानस तक पहुँचाया है।
इन्द्र जीत ने अपने गीतों के माध्यम से नशा मुक्ति, महिला सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों को प्रभावी रूप से उठाया है, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश गया है।
