कमला नेहरू अस्पताल को शिफ्ट नहीं, खत्म करने की साजिश : संदीपनी भारद्वाज

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शिमला। भाजपा प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कमला नेहरू अस्पताल को कथित रूप से IGMC में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर कांग्रेस सरकार को घेरते हुए इसे “व्यवस्था परिवर्तन नहीं, व्यवस्था विनाश” करार दिया है।

उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों से हिमाचल प्रदेश की माताओं और नवजात शिशुओं के लिए जीवनरेखा बना कमला नेहरू अस्पताल आज कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों के कारण खतरे में है।

“जिस संस्थान को शांता कुमार से लेकर वीरभद्र सिंह, प्रेम कुमार धूमल और जयराम ठाकुर की सरकारों ने मजबूत किया, उसे आज कांग्रेस ‘साइलेंट शिफ्टिंग’ के नाम पर खत्म करने पर तुली है,” उन्होंने कहा।

संदीपनी भारद्वाज ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला बिना किसी आधिकारिक आदेश के आगे बढ़ाया जा रहा है।

“16 अप्रैल से शिफ्टिंग के मौखिक निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन कोई नोटिफिकेशन नहीं, यह शासन नहीं, मनमानी है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों, नर्सों और पूरे मेडिकल स्टाफ ने इस फैसले का विरोध किया है, इसके बावजूद सरकार जबरदस्ती निर्णय थोप रही है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि IGMC पहले से ही क्षमता से अधिक भरा हुआ है और वहां 300 बेड के विशेष अस्पताल को समायोजित करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

“जहां पहले ही वार्ड भरे हैं, वहां मातृ एवं नवजात सेवाओं को ठूंसना सीधे-सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ सुविधाओं को अस्थायी रूप से नाले (ड्रेन) के पास शिफ्ट करने की बात सामने आ रही है, “यह केवल कुप्रबंधन नहीं, अमानवीयता है।”

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल के उन्नयन पर 20 करोड़ से अधिक खर्च किया गया था और भविष्य की योजनाएं भी तैयार थीं।

“आज उस पूरी व्यवस्था को खत्म कर दिया जा रहा है। यह जनता के पैसे और स्वास्थ्य दोनों के साथ विश्वासघात है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल की जमीन को अन्य उपयोग जैसे MLA हॉस्टल के लिए इस्तेमाल करने की चर्चाएं गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

“अगर यह सच है, तो यह साफ दर्शाता है कि कांग्रेस सरकार के लिए मरीजों की जान से ज्यादा राजनीतिक सुविधा मायने रखती है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल की लोकेशन जहां मरीजों के लिए अनुकूल है, वहीं IGMC का ठंडा वातावरण नवजात शिशुओं के लिए जोखिम भरा है।

“यह फैसला चिकित्सा विज्ञान नहीं, राजनीतिक दबाव से लिया जा रहा है,” उन्होंने कहा।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ डॉक्टर, नागरिक और सामाजिक संगठन अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं और न्यायालय का रुख भी कर सकते हैं।

अंत में उन्होंने कहा “कांग्रेस सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नाम पर हिमाचल की स्वास्थ्य व्यवस्था को खत्म कर रही है।

भाजपा इस जनविरोधी फैसले का हर स्तर पर विरोध करेगी और मरीजों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर अदालत तक लड़ेगी।”

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