जानिए कार्तिक मास में शालिग्राम शिला दान का मह्त्व

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आज का हिन्दू पंचांग

दिनांक – 18 नवंबर 2021

दिन – गुरुवार

विक्रम संवत – 2078

शक संवत -1943

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – हेमंत

मास – कार्तिक

पक्ष – शुक्ल

तिथि – चतुर्दशी दोपहर 12:00 तक तत्पश्चात पूर्णिमा

नक्षत्र – भरणी 19 नवम्बर रात्रि 01:30 तक तत्पश्चात कृत्तिका

योग – वरीयान् 19 नवंबर रात्रि 3:00 तक तत्पश्चात परिघ

राहुकाल – दोपहर 01:47 से शाम 03:10 तक

सूर्योदय – 06:52

सूर्यास्त – 17:55

दिशाशूल – दक्षिण दिशा में

व्रत पर्व विवरण –

वैकुंठ चतुर्दशी पूजन, व्रत पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा, भीष्मपंचक व्रत समाप्त

विशेष –

चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

शालिग्राम का दान

स्कन्दपुराण के अनुसार

सप्तसागरपर्यंतं भूदानाद्यत्फलं भवेत्।

शालिग्रामशिलादानात्तत्फलं समवाप्नुयात्।

शालिग्रामशिलादानात्कार्तिके ब्राह्मणी यथा।

सात समुद्रों तक की पृथ्वी का दान करने से जो फल प्राप्त होता है, शालग्राम शिला के दान से मनुष्य उसी फल को पा लेता है । अतः कार्तिक मास में स्नान तथा दानपूर्वक शालिग्राम शिला का दान अवश्य करना चाहिए।

तुलसी

ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खण्ड के अनुसार

सुधाघटसहस्रेण सा तुष्टिर्न भवेद्धरेः।

या च तुष्टिर्भवेन्नृणां तुलसीपत्रदानतः।

गवामयुतदानेन यत्फलं लभते नरः।

तुलसीपत्रदानेन तत्फलं लभते सति।

हजारों घड़े अमृत से नहलाने पर भी भगवान श्रीहरि को उतनी तृप्ति नहीं होती है, जितनी वे मनुष्यों के तुलसी का एक पत्ता चढ़ाने से प्राप्त करते हैं। दस हजार गोदान से मानव जो फल प्राप्त करता है, वही फल तुलसी-पत्र के दान से पा लेता है।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार

जो पुरुष कार्तिक मास में श्रीहरि को तुलसी अर्पण करता है, वह पत्र-संख्या के बराबर युगों तक भगवान के धाम में विराजमान होता है।

फिर उत्तम कुल में उसका जन्म होता और निश्चित रूप से भगवान के प्रति उसके मन में भक्ति उत्पन्न होती है, वह भारत में सुखी एवं चिरंजीवी होता है।

शिबिराम्यन्तरे भद्रा स्थापिता तुलसी नृणाम्।

धनपुत्रप्रदात्री च पुण्यदा हरिभक्तिदा ।

प्रभाते तुलसीं दृष्ट्वा स्वर्णदानफलं लभेत्।

ब्रह्मवैवर्तपुराण, श्रीकृष्णजन्मखण्ड, अध्याय 103)

घर के भीतर लगायी हुई तुलसी मनुष्यों के लिये कल्याणकारिणी, धन-पुत्र प्रदान करनेवाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देने वाली होती है।

प्रातः काल तुलसी का दर्शन करने से सुवर्ण-दान का फल प्राप्त होता है।

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