प्रदेश में 1 जून से हर व्यक्ति को मिलेगा अपनी और परिवार की गणना का मौका, प्रदेश में इस बार डिजिटल तकनीक से होगी जनगणना

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मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना 16 जून से शुरू

शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस बार हर व्यक्ति को अपनी और अपने परिवार की गणना का मौका मिलेगा। इसका लाभ यह होगा कि जनगणना का काम तेजी से और पारदर्शी हो सकेगा।

स्वगणना के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। डिजिटल तकनीक के प्रयोग से प्रदेशवासियों को सीधे अपनी गणना और जानकारी अपलोड करने का मौका मिलेगा। इससे जनगणना प्रक्रिया में हर हर नागरिक की सटीक भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

इसके अंतर्गत, अब आम जनता एक सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) के माध्यम से स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेगी।

यह कदम न केवल समय बचाएगा बल्कि डेटा की गोपनीयता और सटीकता को भी बढ़ाएगा । हिमाचल प्रदेश में यह सुविधा 1 जून से 15 जून तक उपलब्ध रहेगी ल। स्व-गणना के पश्चात नागरिकों को एक 11 अंकीय स्व-गणना आई डी नम्बर प्राप्त होगा।

16 जून से 15 जुलाई के मध्य जब जनगणना कर्मी (प्रगणक) घर-घर सर्वेक्षण करेंगे तब उन्हें यह आई.डी. प्रदान करना होगा। ऐसा करने पर स्व-गणना के दौरान पोर्टल पर प्रविष्ट जानकारी स्वतः प्रगणक के मोबाइल ऐप में प्रदर्शित हो जाएगी। यह प्रक्रिया नागरिकों के साथ-साथ प्रगणकों के लिए भी सहायक सिद्ध होगी।

शिमला स्थित जनगणना कार्य निदेशालय ने बताया कि भारत सरकार देश की आगामी जनगणना को पूरी तरह से आधुनिक, पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए संकल्पित है।

इसी श्रृंखला में हिमाचल प्रदेश में जनगणना 2027 का प्रथम चरण यानि मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना 16 जून से 15 जुलाई तक संचालित किया जाएगा।

फील्ड में तैनात प्रगणक इस बार कागजी फॉर्म लेकर नहीं, बल्कि एक अत्याधुनिक HLO मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।

इस ऐप के जरिए वास्तविक समय (Real-time) में डेटा दर्ज होगा, जिससे मानवीय त्रुटियों की सम्भावना खत्म होगी और डेटा प्रोसेसिंग की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी।

जनगणना की इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी और प्रबंधन के लिए Census Management and Monitoring System (CMMS) पोर्टल तैयार किया गया है । यह पोर्टल अधिकारियों को लॉजिस्टिक्स, प्रोग्रेस ट्रैकिंग, प्रशिक्षण और संसाधनों के सही आवंटन में मदद करेगा।

गौरतलब है कि जनगणना 2027 केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया एवं विकसित भारत 2047 की ओर एक सशक्त कदम है।

वहीं, इस डिजिटल बदलाव से न केवल देश के आर्थित संसाधनों की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) तरीके से न्यूनतम समय में अंतिम आंकड़े देश के सामने आ सकेंगे।

जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा प्रदेशवासियों को डिजिटल जनगणना के बारे में संचार के विभिन्न माध्यमों से जागरूक भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में 29 मई को पत्रकारों के साथ संवाद करने का कार्यक्रम भी है

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