डिब्बा बन्द वस्तुओं की खरीद के समय उस पर दर्शाई गई मात्रा की जांच आवश्यक

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शिमला। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के एक प्रवक्ता ने यहां बताया कि विभाग पैकेज्ड खाद्य तेल (रिफान्ड व सरसों) की खरीद के संबंध में उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए उन्हंे जागरूक कर रहा है।

उपभोक्ताओं की जानकारी हेतु यह स्पष्ट किया जाता है कि निर्माता/पैकर किसी भी मात्रा में तेल व अन्य तरल पदार्थ पैक कर सकता है।

पूर्व में तेल के पैकेट कुछ निश्चित (मानक) मात्रा में ही पैक किये जा सकते थे, किन्तु विधिक माप विज्ञान (डिब्बा बन्द वस्तुए) नियम, 2011 के द्वितीय खण्ड़ को भारत सरकार द्वारा निरस्त किये जाने के उपरान्त निर्माता/पैकर किसी भी मात्रा में तेल को पैक कर सकता है। किसी भी प्रकार की डिब्बा बन्द वस्तुओं को क्रय करते समय उस पर दर्शाई गई मात्रा की जांच अवश्य करें।

उन्होंने बताया कि कुछ समाचार-पत्रों में उचित मूल्य की दुकानों पर कम वज़न के रिफाईन्ड तेल के सन्दर्भ में समाचार प्रकाशित हुआ था।

प्रदेश भर में विधिक माप विज्ञान अधिकारियों द्वारा निरीक्षण करने पर पाया गया कि कुछ उपभोक्ता तरल पदार्थों के डिब्बों/पैकेट पर मुद्रित आयतन और वज़न के अंतर को लेकर भ्रम की स्थिति में रहते है।

आमतौर पर तेल के पैकट पर एक निश्चित तापमान पर आयतन (मिलीलीटर या लीटर) या वज़न अंकित किया जाता है। जहां मात्रा आयतन में घोषित की जाती है, वहां वस्तु का वज़न भी बताया जाना अनिवार्य है।

इसलिए उपभोक्ताओं को विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 और विधिक माप विज्ञान (डिब्बा बन्द वस्तुए) नियम, 2011 के तहत निर्धारित अन्य वैधानिक विवरणों शुद्ध मात्रा, निर्माता/पैकर का नाम और पता, पैकिंग का माह और वर्ष, अधिकतम खुदरा मूल्य, उपभोक्ता शिकायत/सहायता विवरण और उपयोग करने की अंतिम तिथि की भी जांच करने की सलाह दी जाती है।

प्रवक्ता ने कहा कि सभी मानक डिब्बा बन्द वस्तुओं पर स्पष्ट, पढ़ने योग्य और आसानी से दिखाई देने चाहिए। उपभोक्ताओं को सूचित किया जाता है कि ऐसे डिब्बों/पैकेट लेते समय आयतन व वजन की सही जांच कर व वस्तु को तोल कर अवश्य देखें।

यदि उपभोक्ताओं को कोई भी जानकारी अस्पष्ट, अनिवार्य जानकारी न होने या मात्रा या कीमत के बारे में कोई संदेह दिखाई देता है, तो उन्हें उचित कार्यवाही के लिए नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (एनसीएच), टोल फ्री नंबर 1800-11-4000 या 1915, तथा सीएम संकल्प हेल्पलाइन 1100 के माध्यम से शिकायत दर्ज करने की सलाह दी जाती है।

उन्होंने कहा कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, उपभोक्ता संरक्षण, व्यापार कार्यप्रणालियों में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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