कांग्रेस सरकार का बागवानी मॉडल पूरी तरह फेल : संदीपनी भारद्वाज

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शिमला। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश सरकार की मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की आशंकाओं को लेकर कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक का नहीं, बल्कि किसानों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और संभावित बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है। यह पूरी तरह से कांग्रेस सरकार का बड़ा फेलियर है।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि सरकारी उपक्रम बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (HPMC) द्वारा MIS के तहत सेब की खरीद में प्रिक्योरमेंट असिस्टेंट स्तर पर गड़बड़ी सामने आना अत्यंत गंभीर विषय है।

रोहड़ू के चिड़गांव खरीद केंद्र में अनियमितताओं के बाद एफआईआर दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि मामला केवल संदेह का नहीं, बल्कि ठोस गड़बड़ी का है। जब अन्य खरीद केंद्रों में भी अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है, तो यह साफ है कि पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में है।

उन्होंने कहा कि गड़बड़ी सामने आने के बाद HPMC द्वारा SDM और तहसीलदार की अध्यक्षता में कमेटियां गठित करना यह दर्शाता है कि सरकार पहले से चली आ रही लापरवाही और विफल निगरानी को अब ढकने की कोशिश कर रही है। सवाल यह उठता है कि जब सेब की खरीद चल रही थी, तब इन कमेटियों की जरूरत क्यों नहीं पड़ी? अब रिपोर्टों का इंतजार कर सरकार समय निकालने का प्रयास कर रही है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि MIS की पेमेंट के लिए बागवानों से आधार कार्ड, उद्यान कार्ड और जमीन के दस्तावेज अनिवार्य करना किसानों के साथ सीधा अन्याय है। जब उद्यान कार्ड में पहले ही जमीन, बागवानी क्षेत्र और उत्पादन से जुड़ी समस्त जानकारी दर्ज है, तो बार-बार दस्तावेज मांगकर किसानों को शक के दायरे में क्यों लाया जा रहा है? यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए अब ईमानदार बागवानों को परेशान कर रही है।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि इस वर्ष MIS के तहत 98,500 मीट्रिक टन से अधिक सेब की खरीद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2023 में, जब आपदा और प्राकृतिक नुकसान इससे कहीं अधिक था, तब लगभग 80 हजार मीट्रिक टन सेब खरीदा गया था।

इस बार पैदावार लगभग समान होने के बावजूद रिकॉर्ड खरीद होना अपने आप में संदेहास्पद है। सरकार का यह तर्क कि सड़कों के बंद होने के कारण सेब खराब हुआ और किसानों ने HPMC को दिया, किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं लगता।

उन्होंने कहा कि मानसून सीजन में सड़कों के लंबे समय तक बंद रहने की आड़ में कई खरीद केंद्रों पर अनियमितताएं की गईं। सूत्रों के अनुसार, जितना सेब वास्तव में खरीदा गया, उससे कहीं अधिक का बिल तैयार किया गया।

कई क्षेत्रों में वास्तविक उत्पादन से कहीं ज्यादा सेब की एंट्री दर्शाई गई, जबकि परिवहन की स्थिति ही संभव नहीं थी। यह पूरे MIS सिस्टम में संगठित गड़बड़ी की ओर संकेत करता है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि HPMC के अनुसार इस वर्ष लगभग 40 हजार बागवानों ने MIS योजना के तहत सेब दिया है और लगभग 115 करोड़ रुपये की खरीद की गई है। इतने बड़े स्तर पर एफआईआर दर्ज होना यह दर्शाता है कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

संदीपनी भारद्वाज ने बागवानी मंत्री के बयानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सब कुछ पारदर्शी था, तो एफआईआर दर्ज करने की जरूरत क्यों पड़ी? यदि केवल एक-दो केंद्रों पर ही गड़बड़ी थी, तो पूरे प्रदेश के बागवानों से दस्तावेज क्यों मंगवाए जा रहे हैं? यह किसानों को डराने और दबाव में लेने की कोशिश है।

उन्होंने मांग की कि MIS योजना के अंतर्गत हुई पूरी खरीद की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच करवाई जाए, दोषी अधिकारियों और प्रिक्योरमेंट असिस्टेंट्स पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा ईमानदार बागवानों को तुरंत राहत दी जाए।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस सरकार ने इस मामले को दबाने या लीपापोती करने का प्रयास किया, तो भाजपा किसानों के हित में सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेगी।

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