बीबीएमबी पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का श्रेय लेने की होड़ बंद करें मुख्यमंत्री, यह 30 वर्षों के संघर्ष और केंद्र सरकार के प्रयासों की जीत : जयराम ठाकुर

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शांता जी ने पानी पर रॉयल्टी की माँग की, वीरभद्र सिंह की सरकार में न्यायालय गई, प्रेम कुमार धूमल सरकार में केस जीते, पूर्व सरकार के समय एरियर के बदले बिजली लेने की कैबिनेट स्वीकृति हुई, 30 साल बाद आया अंतिम फैसला

शिमला। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने अपने निजी आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में बीबीएमबी की बिजली हिस्सेदारी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के 6 नवंबर के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री पर तीखा राजनीतिक हमला बोला।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की लगभग 30 वर्षों की कानूनी लड़ाई को मुख्यमंत्री अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि बताकर राजनीतिक श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि यह सभी पूर्ववर्ती सरकारों के प्रयासों, न्यायपालिका के निर्णय और केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका का परिणाम है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्ष 1966 में पंजाब पुनर्गठन के बाद हिमाचल के अधिकारों का प्रश्न उठा। वर्ष 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में सर्वोच्च न्यायालय में मामला दायर हुआ।

इसके बाद 27 सितंबर 2011 को प्रो प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल की 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि यही इस संघर्ष की सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक उपलब्धि थी, जिसे मुख्यमंत्री सुक्खू नजरअंदाज नहीं कर सकते।

उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने 4 जनवरी 2018 को मंत्रिमंडल में डिफरेंशियल एनर्जी की वापसी के संबंध में आगे बातचीत करने का निर्णय लिया। वर्ष 2019 और 2020 में भी सर्वोच्च न्यायालय में लगातार कार्यवाही हुई। केंद्र सरकार के महान्यायवादी की मध्यस्थता से कैशलेस सेटलमेंट का रास्ता निकला।

अब हिमाचल को पूंजीगत देनदारी के समायोजन के बाद 11,973 मिलियन यूनिट बिजली अगले 20 वर्षों में मिलेगी। सर्दियों के छह महीनों में प्रतिवर्ष लगभग 598 मिलियन यूनिट बिजली मिलने से प्रदेश को राहत मिलेगी।

जयराम ठाकुर ने कहा, “मुख्यमंत्री बताएं कि इस फैसले में उनकी ऐसी कौन-सी विशेष उपलब्धि है जिसका वह ढिंढोरा पीट रहे हैं?

फैसला सर्वोच्च न्यायालय ने तथ्यों और मेरिट के आधार पर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और महान्यायवादी की मध्यस्थता का इसमें महत्वपूर्ण योगदान है।”

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने हिमाचल के पानी पर रॉयल्टी का मुद्दा उठाया था, तब कांग्रेस नेताओं ने उनका मजाक उड़ाया था। आज वही कांग्रेस हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई का श्रेय लेने में जुटी है।

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या अब कांग्रेस अपनी 300 यूनिट मुफ्त बिजली की गारंटी पूरी करेगी? क्या उद्योगों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती बंद होगी? क्या बढ़ते बिजली शुल्क और सेस से राहत मिलेगी?

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों से प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र प्रभावित हुआ है और उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा है।

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के आत्मनिर्भर हिमाचल के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारी डीए, एरियर और मेडिकल बिलों के भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि सरकार लगातार कर्ज ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और सरकार घोषणाओं के सहारे जनता को गुमराह कर रही है।

जयराम ठाकुर ने कहा, “मुख्यमंत्री सुक्खू को समझ लेना चाहिए कि झूठी घोषणाओं और दूसरों के प्रयासों का श्रेय लेने से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। कांग्रेस सरकार रिपीट नहीं, डिफीट होगी। प्रदेश की जनता सरकार से चार वर्षों के कामकाज का हिसाब मांगेगी।

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