नेरवा, नोबिता सूद। पांच दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश से उपमंडल चौपाल और कुपवी में जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है । भारी बारिश से निजी और सरकारी संपत्ति को करोड़ों रुपये के नुक्सान का अनुमान लगाया जा रहा है।

रविवार को उप मंडल कुपवी के अंतर्गत राजकीय उच्च पाठशाला बाग़ का भवन भूस्खलन की चपेट में आने से ज़मींदोज़ हो गया एवं इसमें रखा सारा रिकॉर्ड,फर्नीचर व अन्य सामान दब गया । स्कूल प्रबंधन समिति एवं स्टाफ ने सामान को निकलने की कोशिश जरूर की परन्तु लगातार हो रहे भूस्खलन के आगे उनकी एक ना चल पाई, लिहाजा भवन के अंदर सारा सामान इसमें ही दफ़न हो कर नष्ट हो गया है ।

उधर नेरवा के महामाया डुंडी मंदिर के समीप एक अस्थाई पार्किंग में खड़ी सेंटरो कार शाल्वी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बह कर करीब एक किलोमीटर आगे शिह क्यार पंहुच गई । इसके आलावा नेरवा और चौपाल में शुक्रवार से लेकर रविवार रात तक करीब 45 घंटे तक बिजली गुल रही ।

हालाँकि बोर्ड कर्मियों ने शनिवार को कड़ी मशक्कत के बाद रात पौने नौ बजे बिजली बहाल कर दी थी, परन्तु यह राहत स्थाई साबित न हो सकी और करीब दो घंटे बाद बत्ती एक बार फिर गुल हो गई । इसके बाद बोर्ड कर्मियों की मूसलाधार बारिश के बीच रविवार को की गई मशक्कत के बाद रात करीब सात बजे ही बिजली बहाल हो पाई ।
नेरवा और चौपाल की बिजली तो बहाल हो गई है, परन्तु कई ग्रामीण क्षेत्र अभी भी अँधेरे में डूबे हुए है । सभी नदी नालों का जलस्तर बढ़ने एवं भूस्खलन से नेरवा- पांवटा साहिब मुख्य मार्ग सहित कई संपर्क मार्ग बंद पड़े हुए हैं एवं अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों का नेरवा और चौपाल से संपर्क कटा हुआ है।
नेरवा पांवटा मार्ग पर राणा क्यार में दलटा नाला का जल स्तर बढ़ने से करीब दस मीटर सड़क पूरी तरह बह गई है तथा लोग इस नाले के ऊपर आर पार रखे गए पतले- पतले लकड़ी के खम्भों के ऊपर से जान को खतरे में डाल कर नाला पार कर रहे हैं।
सोमवार को नेरवा में थरोच और शिल्ला क्षेत्र के दो लोगों की मौत हो गई थी एवं उनके शवों को घरों तक पंहुचाना जरूरी था । ऐसे में परिजनों ने शवों को लकड़ीयों में बाँध कर दलटा नाला बड़ी मुश्किल से पार करने के बाद बीस से पच्चीस किलोमीटर पैदल सफर तय कर शवों को घर तक पंहुचाया।

उधर बारिश से धान और मक्की की फसल को भी व्यापक नुक्सान पंहुचने की खबर है। भारी बारिश से मक्की और धान की फसल खेतों में ही बिछ गई है। इसके अलावा जगह जगह हुए भूस्खलन से मकानों,बागीचों और कई अन्य निजी व सरकारी संपत्ति को भी करोड़ों रुपये का नुक्सान होने का अंदेशा है।
