शिमला। आज आर्य कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिमला के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि एवं हिमुडा के उपाध्यक्ष यशवंत छाजटा ने अपने वक्तव्य में कहा कि आर्य समाज भारत का एक धार्मिक और सामाजिक सुधार आंदोलन है जिसकी स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती ने 10 अप्रैल 1875 को मुंबई (तत्कालीन बंबई) में की थी।
यह आंदोलन हिंदू धर्म की मूल वेदिक परंपराओं को पुनः स्थापित करने तथा समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वासों, जातिवाद और सामाजिक असमानताओं के सुधार के लिए शुरू हुआ।
आर्य समाज का जन्म उस समय हुआ जब हमारा जब भारतवर्ष विभिन्न सामाजिक कुरीतियों, विसंगतियों, असमानताओं से पूरी तरह से जकड़ा हुआ था।
ऐसी विकट परिस्थिति में स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने आर्य समाज की स्थापना करके एक नया चिंतन और सामाजिक क्रांति को जन्म दिया।
आर्य समाज केवल एक धार्मिक आंदोलन नहीं बल्कि एक सामाजिक क्रांति है, जिसने भारत में वैज्ञानिक सोच, शिक्षा, समानता और नैतिक मूल्यों की नींव मजबूत की।
आज भी आर्य समाज शिक्षण संस्थानों, सामाजिक कार्यों और धार्मिक सुधारों के माध्यम से समाज में योगदान दे रहा है।
हिमाचल प्रदेश में पंडित पद्म देव जी, विद्याधर जी, दीनानाथ आंधी, लक्ष्मण सिंह आर्य, दुर्गाबाई आर्य गौरा माता जी, विमल कुटियालाजी गुरु रामशरण जी, स्वामी कृष्णानंद विद्या सूरत सिंह जी ने आर्य समाज की गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
हिमाचल प्रदेश के आर्य जनों का स्वतंत्रता इस आंदोलन में भी विशेष योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह भी गौरव की बात है कि आर्य कन्या पाठशाला इस क्षेत्र में कन्याओं की शिक्षा के लिए पहली पाठशाला है। उन्होंने कहा कि आज उन्हें यहां ऐसे विद्यार्थियों को सम्मानित करने का अवसर मिला जिन्होंने पढ़ाई खेलकूद और अन्य कार्यक्रमों में अच्छा प्रदर्शन किया है।
मुख्य अतिथि ने खेलकूद और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विशिष्ट स्थान प्राप्त करने पर पुरस्कृत किया। समारोह के दौरान पाठशाला की प्रिंसिपल कौशल्या वर्मा ने पाठशाला की वार्षिक रिपोर्ट को भी प्रस्तुत किया।
