ऊना। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आज राजकीय महाविद्यालय, ऊना में विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। यह कार्यक्रम हिमाचल के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन के तहत आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे, विशेष रूप से चिट्टे के बढ़ते खतरे के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें इस लड़ाई में सक्रिय भागीदार बनाना रहा।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक, हिमाचल प्रदेश ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चिट्टे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। युवाओं की जागरूकता, उनकी भागीदारी और सही समय पर सही कदम इस जन आंदोलन को मजबूत बना सकते हैं।

विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान ड्रग्स, चिट्टा, साइबर क्राइम और युवाओं को प्रभावित करने वाले नए खतरों पर चर्चा की गई। DGP ने युवाओं को सतर्क रहने और सोशल मीडिया तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए होने वाले अपराधों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी सवाल पूछे और नशे की ओर युवाओं के बढ़ते आकर्षण के कारणों पर चर्चा की।
इस दौरान यह बात सामने आई कि युवावस्था में नया अनुभव, peer pressure, curiosity और तत्काल gratification/dopamine rush जैसी प्रवृत्तियां युवाओं को जोखिम भरे फैसलों की ओर धकेल सकती हैं।
विद्यार्थियों को समझाया गया कि नशे से मिलने वाला अस्थायी “high” वास्तविक खुशी या सफलता नहीं, बल्कि धीरे-धीरे निर्भरता और जीवन पर नियंत्रण खोने का कारण बन सकता है।
कार्यक्रम में आकृति तथा Commandant, 1st Battalion ने भी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और उन्हें नशे से दूर रहने तथा अपने आसपास के युवाओं के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।
लेडी कॉन्स्टेबल निकिता ने विद्यार्थियों से सहज और युवा-केंद्रित अंदाज में बातचीत करते हुए कहा कि अगर कोई दोस्त नशे की गिरफ्त में जा रहा है तो उसका मजाक उड़ाने या उसे बदनाम करने के बजाय उसकी मदद करनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने दोस्तों का ध्यान रखने और चिट्टा बेचने वालों अथवा संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने का आग्रह किया।
विद्यार्थियों से कहा गया कि वे किसी भी आपात स्थिति या पुलिस सहायता के लिए 112 का उपयोग करें तथा हिमाचल प्रदेश पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया और WhatsApp चैनलों से जुड़े रहें।
DGP ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल नशे के खिलाफ संदेश सुनने वाले दर्शक न बनें, बल्कि अपने कॉलेज, दोस्तों और समाज में जागरूकता फैलाने वाले एक्टिव पार्टिसिपेंट्स बनें।
उन्होंने कहा कि चिट्टे के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी, जब पुलिस के साथ युवा, शिक्षक, अभिभावक और पूरा समाज मिलकर काम करेगा। हिमाचल के युवाओं की ऊर्जा, समझ और जिम्मेदारी इस जन आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।
