शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य एवं हितों की सुरक्षा के मद्देनजर प्रदेश में एनालॉग/नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत जारी आदेश में ऐसे उत्पादों को पनीर के रूप में प्रस्तुत अथवा बिक्री करने पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिनमें दूध की वसा, मिल्क सॉलिड्स अथवा अन्य दुग्ध घटकों को पूरी या आंशिक रूप से वनस्पति तेल, वनस्पति वसा अथवा गैर-दुग्ध घटकों से प्रतिस्थापित किया गया हो।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त हिमाचल प्रदेश आशीष सिंहमार द्वारा 20 अगस्त को जारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध पूरे हिमाचल प्रदेश में लागू होगा। आदेश का उद्देश्य उपभोक्ताओं को वास्तविक पनीर और पनीर जैसे दिखने वाले गैर-डेयरी उत्पादों के संबंध में भ्रमित होने से बचाना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी व्यक्ति अथवा Food Business Operator (FBO) एनालॉग/नॉन-डेयरी पनीर को पनीर के नाम से निर्मित, प्रोसेस, पैक, स्टोर, परिवहन, वितरित, सप्लाई, बिक्री के लिए प्रदर्शित अथवा बेच नहीं सकेगा।
हालांकि, अलग से मानकीकृत और वैध खाद्य उत्पाद, जो पनीर के विकल्प के रूप में कानून के अनुसार निर्मित एवं लेबल किए गए हों, इस आदेश के दायरे में नहीं आएंगे, बशर्ते उन्हें निर्धारित कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप ही बेचा एवं प्रस्तुत किया जाए।
होटल, रेस्तरां, ढाबे, कैटरर्स, कैंटीन, मैस, हॉस्टल, संस्थान, क्लाउड किचन तथा अन्य खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जहां मेन्यू, बिल, डिस्प्ले, विज्ञापन या किसी अन्य माध्यम से सामग्री को ‘पनीर’ के रूप में दर्शाया गया है, वहां केवल निर्धारित खाद्य मानकों के अनुरूप वास्तविक पनीर का ही उपयोग किया जाए।
एनालॉग/नॉन-डेयरी पनीर को वास्तविक पनीर के रूप में तैयार, स्टोर, परोसा अथवा सप्लाई नहीं किया जा सकेगा।
आदेश के तहत पैकेज्ड पनीर की लेबलिंग, पहचान और ट्रेसेबिलिटी को भी अनिवार्य किया गया है। खाद्य कारोबारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उत्पाद का नाम एवं विवरण उसकी वास्तविक प्रकृति और संरचना के अनुरूप हो।
खाद्य कारोबारियों को पनीर की खरीद से संबंधित बिल, इनवॉयस, स्रोत का विवरण, बैच संबंधी जानकारी तथा अन्य आवश्यक रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने होंगे, ताकि निरीक्षण या जांच के दौरान उत्पाद के स्रोत और आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाया जा सके।
खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए आदेश में कहा गया है कि प्रतिष्ठान द्वारा खरीदा, प्राप्त, संग्रहित, उपयोग अथवा बेचा जाने वाला पनीर निर्धारित मानकों के अनुरूप तथा वैध एवं ट्रेसेबल स्रोत से प्राप्त होना चाहिए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी या सक्षम प्राधिकारी द्वारा मांग किए जाने पर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करना भी अनिवार्य होगा।
उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
आदेश के अनुपालन के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और अन्य अधिकृत अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि किसी स्थान पर एनालॉग/नॉन-डेयरी पनीर को पनीर के रूप में निर्मित, संग्रहित, परिवहन, सप्लाई, बिक्री अथवा उपयोग करते हुए पाया जाता है, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
आवश्यकता पड़ने पर नमूने लेकर उनका प्रयोगशाला परीक्षण भी करवाया जा सकता है। कानून के अनुसार जब्ती, डिटेंशन, रिकॉल, निस्तारण अथवा नष्ट करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति अथवा खाद्य कारोबारियों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत सब-स्टैंडर्ड, मिसब्रांडेड अथवा असुरक्षित खाद्य पदार्थों से संबंधित प्रावधानों और निर्धारित दंडात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई निरीक्षण, सैंपलिंग, जांच और प्रयोगशाला विश्लेषण में सामने आए तथ्यों तथा उल्लंघन की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर की जाएगी।
यह आदेश हिमाचल प्रदेश के राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी होकर एक वर्ष तक लागू रहेगा, जब तक कि इसे कानून के अनुसार वापस, संशोधित अथवा निरस्त न किया जाए। आदेश के प्रावधान प्रदेशभर के सभी संबंधित खाद्य कारोबारियों एवं खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों पर लागू होंगे।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने सभी खाद्य कारोबारियों से आदेश का कड़ाई से पालन करने तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और सही जानकारी के साथ खाद्य उत्पाद उपलब्ध करवाने का आह्वान किया है।
