शिमला। सामुदायिक चिकित्सा विभाग इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला द्वारा MBBS अंतिम वर्ष प्रशिक्षुओं के लिए एड्स पर जागरूकता वा संवेदीकरण कार्यकाल आयोजित किया गया।
आईजीएमसी शिमला की प्रधानाचार्य डॉ सीता ठाकुर, विभागाध्यक्ष सामुदायिक चिकित्सा विभाग डॉ अनमोल गुप्ता के सफल मार्गदर्शन, जिला चिकित्सा अधिकारी शिमला डॉ यशपाल रांटा, जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डा तहसीन के सहयोग से और सहायक प्राचार्य डॉ गोपाल आशीष शर्मा की अगुवाई में इस कार्यक्रम को सफलता का आयोजन किया गया।

इस संवेदीकरण सत्र में डॉ गोपाल आशीष शर्मा ने MBBS प्रशिक्षुओं को HIV/AIDS रोकथाम और नियंत्रण एक्ट 2017 पर समूह सहभागिता और चर्चा के माध्यम से जागरूक किया।
कार्यक्रम में HIV /AIDS रोकथाम और नियंत्रण वा HIV के साथ रह रहे व्यक्तियों के मानवाधिकारियों की रक्षा जैसे उपरोक्त एक्ट के मुख्य लक्ष्यों पर प्रकाश डाला गया।
डॉ गोपाल आशीष ने बताया कि यह एक्ट सार्वभौमिक परीक्षण और उपचार सुनिश्चित करता है और निजी संस्थानों पर भी यह एक्ट लागू होता है। एक्ट सेक्शन-29 के माध्यम से यह साफ तौर पर कहता है कि रक्षित लाभार्थी (HIV/AIDS) के साथ रहने वाले व्यक्ति को रिहाइश या साझा रिहाइश मुहैया करवाई जाए।

एक्ट सेक्शन 3 में HIV के साथ रह रहे व्यक्तियों की साफ तौर पर किसी भी तरह के साथ कार्य स्थल / सामुहिक स्थल/ स्वास्थ्य संस्थान/ शिक्षा संस्थान में भेद भाव का खंडन करता है और इसी में अनुलंघन उपरांत 2 वर्ष तक के कारावास और/या 1 लाख तक जुर्माने का भी प्रावधान है।
साथ ही उपरोक्त एक्ट HIV /AIDS संचरण के रोकथाम के हेतु हर संभव स्वास्थ्य रख रखाव सुविधा जैसे काउंसलिंग, सुरक्षित यौन संबंध हेतु कॉन्डम उपलब्धता भी वितरण, इलाज हेतु दवाओं और इंजेक्शंस की उपब्धता जैसे अन्य सुविधाओं को भी सुनिश्चित करता है।

कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं ने लोकपाल बिल पर भी चर्चा की, और लोकपाल का HIV/AIDS रोकथाम और नियंत्रण एक्ट के उलंघन या किसी भेद भाव की शिकायत निवार हेतु कार्यवाही पर प्रकाश डालये हुए संस्थान के शिकायत निवारण अधिकारी, लोकपाल, और मजिस्ट्रेट के इस एक्ट में किरदार पर भी प्रकाश डाला।
HIV/AIDS के साथ रह रहे व्यक्तियों के साथ भेद भाव और समाजिक अप्रधान को एक्ट की उलंघना मानते हुए कारागार या/और जुर्माने का प्रावधान है।
हर संस्थान जिसमें 100 या उससे अधिक व्यक्ति पंजीकृत हों और स्वास्थ्य संस्थान जहां 20 या उससे अधिक व्यक्ति पंजीकृत हों वह सभी संस्थान इस एक्ट के शिकायत निवारण प्रणाली के आधीन हैं।
सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्राचार्य डॉ दिनेश्वर सिंघ डडवाल, MBBS स्नातक प्रभारी वा सह प्राध्यापक डॉ अंजलि महाजन, सहायक प्राचार्य डॉ तृप्ति चौहान, डॉ विजय बरवाल और सहायक प्राध्यापक डॉ प्रेम चौहान, डॉ अमित सचदेवा के सफल मार्गदर्शन वा सामुदायिक चिकित्सा विशेषज्ञ/रेजिडेंट्स डॉ साक्षी, डॉ रोहित, डॉ अर्चित, डॉ अनुज, डॉ आकृति, डॉ शाहनवाज, डॉ अश्मिता, डॉ तमन्ना, डॉ रानो, डॉ आशिमा, डॉ भानु, डॉ कुदरत और डॉ मोहित के कर्मठ सहयोग से इस कार्यक्रम का सफल क्रियान्वन किया गया।
