मडावग में हिंदलोक सेवा फाउंडेशन ने आत्मनिर्भरता पर किया शिविर का आयोजन

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दर्जनों महिलाओं ने लिया आत्मनिर्भरता का संकल्प

चौपाल (शिमला)। विकास खंड चौपाल के अंतर्गत आने वाली मडावग पंचायत में हिंदलोक सेवा फाउंडेशन के तत्वावधान में एक दिवसीय रोजगार एवं जागरूकता शिविर का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पुरंदर परगना की महिलाओं ने भारी संख्या में भाग लिया और आत्मनिर्भरता का संकल्प लिया।

शिखर जीवन और स्वरोजगार : कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण

शिविर का मुख्य आकर्षण महिलाओं को “शिखर जीवन जीने के महत्व” और “शिखर गुर” के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ने की अनूठी पहल रही, जिससे ग्रामीण आजीविका को नई दिशा मिल सके।

फाउंडेशन के संस्थापक राठौड़ राजेश रढाईक ने आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा की।

रढाईक ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना समाज के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने आजीविका मिशन के माध्यम से स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी और कहा कि महिलाओं को अपनी क्षमता और कौशल के आधार पर स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

नशा मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

कार्यक्रम के दौरान फाउंडेशन के संस्थापक ने मडावग की महिलाओं को समाज से नशा जैसी गंभीर बुराई को जड़ से खत्म करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल किसी एक संस्था या विभाग तक सीमित नहीं रखा जा सकता।

“मातृशक्ति को आगे आकर इसे जनआंदोलन का रूप देना होगा,” रढाईक ने कहा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी लोगों को अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।

इस प्रेरणादायक कार्यक्रम में क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने विचारों से महिलाओं को प्रोत्साहित किया

विशेष अतिथि समाजसेवी बालम गोगटा ने महिलाओं को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। रुस्लाह वार्ड से खंड विकास समिति सदस्य एवं जिला शिमला वुमन सेल की उपाध्यक्ष लक्ष्मी देवी ने भी अपने विचार रखे।

हिंदलोक सेवा फाउंडेशन : परिचय

हिंदलोक सेवा फाउंडेशन एक गैर-सरकारी संगठन है जो भारत की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सद्भाव और सामुदायिक विकास के लिए समर्पित है। यह फाउंडेशन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (सारा विश्व एक परिवार है) के प्राचीन भारतीय दर्शन से प्रेरित है और इसका उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ हर व्यक्ति सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के साथ जी सके।

फाउंडेशन का पंजीकरण 23 सितंबर 2023 को हुआ था और इसका मुख्यालय चौपाल, शिमला में स्थित है। संस्थापक राठौड़ राजेश रढाईक के नेतृत्व में फाउंडेशन महिला सशक्तिकरण, नशा मुक्ति अभियान, और पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम का प्रभाव और भविष्य की राह

इस अवसर पर सभी उपस्थित सदस्यों ने नशामुक्ति और जागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने न केवल महिलाओं को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा, बल्कि उन्हें सामाजिक परिवर्तन का सक्रिय हिस्सा बनने के लिए प्रेरित भी किया।

स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की प्रधान, सचिव और सदस्य, आशा कार्यकर्ता तथा नशामुक्त अभियान की पंचायत समन्वयक मौजूद रहीं और सभी ने नशामुक्ति और जागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

यह कार्यक्रम पुरंदर परगना के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ, जहाँ महिलाओं ने न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का मार्ग चुना, बल्कि सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का भी संकल्प लिया।

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