सुजानपुर/हमीरपुर। सुजानुपर में नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मची धमाल-चौकड़ी के बीच आखिर विधायक राजेंद्र राणा के सियासी पैंतरे ने विधानसभा चुनावों के बाद एक बार फिर अपना कमाल दिखाया है।
नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी व कांग्रेस के 4-4 समर्थित उम्मीदवार जीते हैं। इस तरह यहां बीजेपी व कांग्रेस नगर परिषद की जंग में बराबरी पर रही है। एक आजाद उम्मीदवार जीते हैं।
बराबरी की इस जंग में यहां नगर परिषद की सरदारी का चुनाव जहां सत्ताधारी बीजेपी के लिए नाक का सवाल बना हुआ था, वहीं कांग्रेस ने भी चुनाव को साख का सवाल बनाया हुआ था।
हालांकि जीते आजाद उम्मीदवार को भी जीत के बाद बीजेपी ने अपना करार दिया था। लेकिन समर्थन के नाम पर चुनाव में उतरती दफा समर्थन न देने के दगा को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना चुके इस उम्मीदवार की नाराजगी भी जीत के बावजूद भी बीजेपी से बरकरार रही।
अगर बीजेपी के चुनावी गणित को समझें तो आजाद प्रत्याशी को मिलाकर बीजेपी के पास बड़ा नंबर था। एक तरह से बीजेपी के 9 में से यहां 4+1 पार्टी समर्थित जीते पार्षद माने जा रहे थे। ऐसे में बीजेपी को अपनी जीत पर पूरा भरोसा था लेकिन अब यहां बीजेपी को मतों से कौन मात दे गया और कौन दगा दे गया। यह सवाल बीजेपी के लिए हार के बावजूद सवाल ही बना हुआ है।
आजाद उम्मीदवार को मिलाकर लॉयन शेयर होने के बावजूद यहां अगर बीजेपी औंधे मुंह गिरी है तो यह राणा के राजनीतिक कौशल का कमाल माना जा रहा है। हालांकि अध्यक्ष पद को नाक और साख का सवाल बना चुकी बीजेपी ने सरदारी के खेल में धौंस-दबाव के तमाम हथकंडे अपनाते हुए सरकारी तंत्र और मंत्र का भी खूब इस्तेमाल किया।
मामला कोतवाली तक जा पहुंचा। लेकिन आखिर में इस सारे खेल में जहां बीजेपी औंधे मुंह धड़ाम हुई वहीं राणा के जलबे का जादू सुजानपुर शहर में हर किसी के सिर चढ़ कर बोला।
बीजेपी के हर पैंतरे का तोड़ अपनी आस्तीन में रखने वाले राणा ने अपने राजनीतिक हुनर व विश्वास के दम पर चारों खाने चित्त किया। राणा के इस राजनीतिक कौशल की चर्चा दिन भर सुजानपुर शहर में चली रही, जबकि जीत के बावजूद हारी बीजेपी मन मसोस कर उदास व हताश रही।