लाॅकडाउन में भी ऊना जिला में किसानों ने किया रिकाॅर्ड आलू उत्पादन

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शिमला, 24 मई, 2020। भौगोलिक दृष्टि से भले ही ऊना प्रदेश का एक छोटा जिला है लेकिन इस जिले को प्रदेश का खाद्यान्न भंडार कहलाने का गौरव भी हासिल है। सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं और

नवीनतम कृषि तकनीक का पूरा फायदा उठा कर यहां के किसान न केवल अपनी आर्थिकी समृद्ध कर रहे हैं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

अन्न उत्पादन और बेमौसमी सब्जियों की खेती में तो इस जिला के किसानों ने नाम कमाया ही है, साथ ही इस जिला को आलू उत्पादन में भी प्रदेश का एक अग्रणी जिला बनाया है।

इस बार लाॅकडाउन की लंबी अवधि के बीच भी यहां आलू की बंपर फसल हुई है, जिससे किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।

वैसे भी ऊना जिला की कृषि उपज में आलू फसल का अहम स्थान है। आलू उत्पादन यहां वर्ष में दो बार रबी व खरीफ मौसम में किया जाता है। आलू की यह पैदावार कृषकों की आय में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

जिला के कृषि उप निदेशक डाॅ. सुरेश कपूर ने बताया कि रबी मौसम में 922 हेक्टेयर भूमि से 13830 मीट्रिक टन जबकि खरीफ मौसम में 947 हेक्टेयर क्षेत्र से 14205 मीट्रिक टन आलू प्राप्त होता है और इस बार भी जिला में आलू की बंपर फसल हुई है।

जिला में तैयार आलू की उपज को जिला सहित अन्य बाहरी मंडियों में बेचा जाता है। इसके साथ-साथ इस आलू को चिप्स बनाने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

कृषि विभाग द्वारा कृषकों से आलू 1800 रुपये से 2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से क्रय किया गया गया है, जिससे कृषकों को काफी लाभ मिला है। कृषि विभाग द्वारा कृषकों को कुफरी ज्योति का बीज अनुदान पर उपलब्ध करवाया गया था जिससे आलू की अच्छी पैदावार हुई है।

कोविड-19 के कारण लंबे लाॅकडाउन की वजह से कृषकों को डर था कि कहीं उनकी फसल खेतों में ही न रह जाए परन्तु उनकी यह आशंका निर्मूल साबित हुई। कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा आलू की फसल की कटाई व मार्किटिंग की उचित व्यवस्था की गई।

विभाग द्वारा कृषकों व मजदूरों को 4450 कफ्र्यू पास जारी किए गए और अधिकारियों ने स्वयं कृषकों के खेतों में जाकर किसानों की हर संभव सहायता की। विभाग द्वारा कृषकों को निःशुल्क मास्क, दस्ताने व सेेनेटाइजर भी उपलब्ध करवाए गए और उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग के लिए भी जागरूक किया गया।

इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा कृषकों को खरीफ मौसम में बीजाई हेतु मक्की व चारा के बीज भी 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

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