शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास में आज सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2025 (27 अक्तूबर से 2 नवम्बर) के अंतर्गत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका विषय था “सतर्कता : हमारी साझा ज़िम्मेदारी” (Vigilance: Our Shared Responsibility)।
इस अवसर पर दो महत्त्वपूर्ण प्रस्तुतियाँ दी गईं और तत्पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति नवदीप सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शिमला द्वारा “साझा सतर्कता और ज़िम्मेदारियों के कानूनी पहलू और विषय अध्ययन (Legal Aspects and Case Studies of Shared Vigilance and Responsibilities)” विषय पर दी गई।
अपने प्रभावशाली और प्रेरक वक्तव्य में उन्होंने बताया कि सतर्कता केवल नियमों या औपचारिक प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक नैतिकता, ईमानदारी और संगठनात्मक संस्कृति की बुनियाद है।
उन्होंने विभिन्न व्यावहारिक उदाहरणों और प्रकरण अध्ययनों के माध्यम से बताया कि साझा सतर्कता की भावना तभी विकसित होती है जब प्रत्येक व्यक्ति अपने दायित्व के प्रति निष्ठा, पारदर्शिता और आत्म-जवाबदेही के साथ कार्य करे।
उन्होंने कहा कि सतर्कता का अर्थ भय नहीं, बल्कि आंतरिक जागरूकता और नैतिक साहस है।
उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की भावना का उल्लेख करते हुए कहा “भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की भावना को आत्मसात करके ही हम ऐसी सामाजिक व्यवस्था बना सकते हैं, जहाँ योग्यता धन पर और विश्वास लेनदेन पर विजय पाता है।”
नवदीप सिंह ने इस बात पर बल दिया कि डिजिटल शासन (Digital Governance) और तकनीकी निगरानी (Tech-based Vigilance) आधुनिक सतर्कता तंत्र के दो प्रमुख स्तंभ हैं, जिनसे पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को नई दिशा मिलती है।
दूसरी प्रस्तुति रवि छावल, निदेशक (सुरक्षा एवं प्रौद्योगिकी), दूरसंचार विभाग, शिमला द्वारा “नागरिक केंद्रित पहलों (Citizen Centric Initiatives of the Department of Telecommunications) विषय पर दी गई।
उन्होंने बताया कि दूरसंचार विभाग पारदर्शी प्रशासन और जन-सुविधा को सुदृढ़ करने के लिए अनेक तकनीकी नवाचारों को लागू कर रहा है।
उन्होंने “संचार साथी” जैसे नागरिक-सहभागी डिजिटल प्लेटफॉर्म की उपयोगिता समझाते हुए बताया कि यह पहल साइबर सुरक्षा, शिकायत निवारण और जन-जागरूकता में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही है।
सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर विशेष व्याख्यान
सतर्कता सप्ताह की प्रस्तुतियों के बाद, सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर डॉ मुक्तिकांत मोहंती, फेलो, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान ने “सरदार पटेल और राष्ट्रीय एकता का विचार (Sardar Patel and the Idea of National Integration)” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का व्यक्तित्व भारत की राजनीतिक एकता, प्रशासनिक निष्ठा और राष्ट्रीय दृढ़ता का सर्वोत्तम प्रतीक है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश की 562 रियासतों को एक सूत्र में बाँधना उनकी दूरदर्शिता और संगठनात्मक कौशल का अनुपम उदाहरण था।
“पटेल ने केवल भूगोल का नहीं, बल्कि भारत के आत्मा का एकीकरण किया, उन्होंने ‘राष्ट्र’ को प्रशासनिक ढाँचे के रूप में नहीं, बल्कि नैतिक एकता के रूप में परिभाषित किया,” डॉ. मोहंती ने कहा।
सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर एस रंगनाथ द्वारा की गई, जिन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि सरदार पटेल भारतीय प्रशासनिक परंपरा के ऐसे स्तंभ हैं जिनके विचार आज भी सुशासन, नैतिकता और एकता के लिए दिशासूचक हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता की शपथ भी ली गई। कार्यक्रमों में संस्थान के फेलो, टैगोर फेलो, अध्येता, अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
दोनों कार्यक्रमों का संचालन अखिलेश पाठक, जनसंपर्क अधिकारी द्वारा किया गया।
