शिमला। आईजीएमसी में आरडीए डॉक्टर्स ने अपनी स्ट्राइक खत्म कर दी है। आज दिल्ली से लौटने के बाद सीएम ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा था कि प्रदेश के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में आम आदमी, गरीब, किसान और बागवान उपचार के लिए आते हैं।
उनके मन में एक आशा होती है कि ठीक होकर घर जाएंगे। अगर डॉक्टर्स उनसे प्यार से बात कर लें, तो 50 प्रतिशत मरीज वैसे ही ठीक हो जाता है।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला का मामला अलग तरह का है, यहां मरीज से वार्तालाप के दौरान डॉक्टर उत्तेजित हो गए। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। इस मामले में कार्रवाई के बाद डॉक्टर्स का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला था, उन्होंने कुछ साक्ष्य सौंपे, जिनके आधार पर पुनः जांच के लिए आश्वस्त किया था। बावजूद इसके डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए।
सीएम ने डॉक्टर्स से अनुरोध किया था कि वे अपना अहम छोड़कर सोमवार से ड्यूटी जॉइन करें, उनके साथ वार्ता के दरवाजे खुले हैं। हमारी सरकार ने डॉक्टर्स के हित में अनेक फैसले लिए हैं, सीनियर रेजिडेंट्स को तनाव मुक्त करने के लिए 48 घँटे की जगह उनकी ड्यूटी 12 घँटे की है। उनका स्टाइपेंड भी 50% से 170% तक बढ़ाया है।
आरडीए द्वारा जारी प्रेस रिलीज में बताया गया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा 28 तारीख को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन को उक्त मामले की विस्तृत जांच शुरू करने और डॉ राघव नरूला की बर्खास्तगी रद्द करने के आश्वासन के अनुसार, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला, हिमाचल प्रदेश के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री के वचन पर विश्वास करते हुए, जनहित में तत्काल प्रभाव से आईजीएमसी शिमला के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेते हैं।
बर्खास्तगी आदेश रद्द होने तक उक्त जांच में आरडीए आईजीएमसी शिमला को पूर्णतः अधिकार प्राप्त रहेगा और आगे की कार्ययोजना पर बैठक 3 जनवरी 2026 को होगी।
