नशा मुक्त हिमाचल की ओर बड़ा कदम, चिट्टा के खात्मे के लिए दो एनजीओ एक मंच पर

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साईं जनजागरण एवं विकास समिति और संजीवनी ग्रुप ऑफ़ एनजीओ ने मिलाया हाथ, प्रदेश स्तर पर छेड़ेंगे निर्णायक लड़ाई

शिमला। हिमाचल प्रदेश में युवाओं को खोखला कर रहे जानलेवा ड्रग चिट्टा (सिंथेटिक ड्रग्स) के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक अभियान शुरू होने जा रहा है। समाज के इस अभिशाप को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए दो गैर-सरकारी संगठन (NGO), साईं जनजागरण एवं विकास समिति और संजीवनी ग्रुप ऑफ़ एनजीओ – ने प्रदेश स्तर पर हाथ मिला लिया है।

दोनों संगठनों के इस महा-गठबंधन ने स्पष्ट कर दिया कि ‘चिट्टा’ के सौदागरों और इसके जाल में फंसे युवाओं को बचाने के लिए वह हर मोर्चे पर काम करेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि यह सहयोग न सिर्फ एक बड़ी जागरूकता क्रांति लाएगा, बल्कि नशे के खिलाफ चल रहे सरकारी प्रयासों को भी नई धार देगा।

अभियान का लक्ष्य: ‘चिट्टा’ मुक्त हिमाचल

इस संयुक्त अभियान का मुख्य फोकस प्रदेश के कोने- कोने में फैल चुके ‘चिट्टा’ (हिरोइन, मेफेड्रोन आदि) के खतरे को मिटाना है। संगठन विशेष रूप से शिक्षण संस्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में गहन जागरूकता कार्यक्रम चलाएंगे, पुनर्वास में सहयोग करेंगे और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर नशा-विरोधी कार्रवाई को मजबूत करेंगे।

यह गठबंधन नशा-विरोधी आंदोलन में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो संकेत देता है कि प्रदेश के नागरिक अब अपने युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतर चुके हैं।

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