नेरवा, नोविता सूद, नेरवा में सोमवार से चल रही श्री मद्भागवत कथा का जादू लोगों के सर चढ़ कर बोल रहा है । नेरवा, चौपाल ही नहीं सम्भवतया जिला शिमला के सबसे बड़े बन चुके इस आयोजन में तहसील नेरवा व चौपाल उपमंडल से ही नहीं अपितु पड़ोसी राज्य उत्तराखंड से भी भारी संख्या में रोजाना हजारों की संख्या में लोग शिरकत कर भक्तिरस का रसपान करने आ रहे हैं।
शुक्रवार को पंद्रह हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने कथा में शिरकत की तथा शनिवार को छुट्टी के चलते यह संख्या बीस हजार को छू गई । रविवार को भी बीस हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने इस आयोजन में शिरकत की।
आयोजन समिति द्वारा नेरवा के कॉलेज ग्राउंड में पांच हजार लोगों के लिए एक पांडाल बनाया गया है, परन्तु जैसे जैसे कथा समापन की तरफ बढ़ रह है यह पांडाल बहुत छोटा साबित हो रहा है। कथा के प्रति ऐसी दीवानगी देखी जा रही जा रही है कि हजारों लोग कड़कती धुप की परवाह किये बिना पांडाल के बाहर बैठ कर कथा का श्रवण कर रहे हैं।
आयोजकों द्वारा कथा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दो जगह ठन्डे मीठे शरबत की छबील लगाईं गई है तथा प्रतिदिन भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हजारों लोग प्रसाद करहां कर बांके बिहारी और डुंडी माता का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
वृन्दावन धाम से आये वेद व्यास गौरव कृष्ण गोस्वामी द्वारा रोजाना दस से तीन बजे तक श्री मद्भागवत कथा का व्याख्यान किया जा रहा है तथा इसके बाद रात को सात से ग्यारह बजे तक कुल्लू की कीर्तन मण्डली द्वारा भजन संध्या के माध्यम से माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया है।
इस आयोजन में तहसील नेरवा के समस्त लोग पूरे तन मन और धन से सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं। शनिवार को नेरवा के निकटवर्ती ग्रामों रिंजट से बिजट महारज,देईया से लंकडवीर व धारटूआ से देवी माता भी आयोजकों के निमंत्रण पर भागवत में शिरकत करने अपने हजारों श्रद्धालुओं के नेरवा पहुँची।
जब यह तीनों देवता एक साथ नेरवा बाज़ार से गुजरे तो ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचते गाते श्रद्धालुओं ने समा बांध दिया। ट्रैफिक पुलिस ने वाहनों को रोक कर इनके जाने का रास्ता साफ किया। पुराने बस अड्डे पर व्यापारियों ने शर्बत की छबील लगाई थी। उस पर हजारों लोगों ने शर्बत का आनन्द लिया।
