नेरवा, नोविता सूद। अप्रैल महीने के दुसरे पखवाड़े में हो रही झमाझम ने किसानों बागवानों की टेंशन बढ़ा दी है। क्षेत्र में बीते दो दिनों से सुबह शाम हो रही बारिश से क्षेत्र का तापमान गिरने से पूरा क्षेत्र ठण्ड की चपेट में है।
बारिश से ठण्ड बढ़ने के चलते अप्रैल महीने में भी जनवरी जैसी ठंडक का अहसास हो रहा है। पारा गिरने से जहां लोगों को एक बार फिर से गर्म कपडे निकालने पड़ गए हैं, वहीँ इस बारिश का सेब सहित अन्य नकदी फसलों पर भी व्यापक असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों ने इन दिनों बेंगन, मिर्च, शिमला मिर्च की पनीरी सहित बीन्स, टमाटर व अन्य नकदी सब्जियां अपने खेतों व क्यारियों में लगाईं हैं। तापमान में अप्रत्याशित गिरावट एवं जमीन में नमी होने से जहां खेतों में लगाईं गई पनीरी सहित बीन्स व अन्य सब्जियों के बीज जमीन में ही सड़ना शुरू हो गए हैं।
वहीँ मटर की फलियों में कालापन आने से इसकी फसल पर संकट के बादल छ गए हैं। स्थानीय किसानों पाणु राम व मान सिंह ने बताया कि उन्होंने बड़े पैमाने पर मटर और बीन्स लगाईं थी, परन्तु बारिश के चलते बीन्स का बीज उगने से पहले ही सड़ गया है तथा मटर की फलियां काली होने शुरू हो गई हैं।
उधर सात हजार से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों सेब की फ्लॉवरिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मना जाता है कि सेब की फ्लॉवरिंग के लिए मौसम में गर्माहट आवश्यक रहती है, परन्तु बेमौसमी बारिश से ठण्ड बढ़ने के चलते फ्लॉवरिंग के दौरान प्रागण प्रक्रिया के प्रभावित होने से हाइट वाले सेब की फसल पर भी संकट के बादल छा गए हैं।
स्कैब की रोकथाम के लिए इन कीटनाशकों का करें छिड़काव
बागवानी विकास अधिकारी चौपाल श्याम शर्मा ने बागवानों को सलाह दी है कि सेब में लगने वाले स्कैब रोग की रोकथाम के लिए कार्बेन्डाजिम, थायोफिनेट, हेक्सकोनाज़ोल एक सौ ग्राम या मैक्लोबुटनिल 80 ग्राम का छिड़काव करें।
