हिमाचल के शहर अब ए आई सक्षम स्मार्ट सिटी के रूप में रहे उभर : गोकुल बुटेल

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शिमला। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गोकुल बुटेल ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में आयोजित अर्बन इनोवेशन समिट में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।

इस प्रतिष्ठित शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया।

राज्यपाल ने गोकुल बुटेल का आभार व्यक्त करते हुए शिखर सम्मेलन में उपस्थित अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों और हितधारकों से विशेष आग्रह किया कि वह हिमाचल प्रदेश के ‘डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस मॉडल’ का गहन अध्ययन करें और इसे एक बेंचमार्क के रूप में अपनाएं।

शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोकुल बुटेल ने कहा, आज की बदलती दुनिया में नवाचार अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारे शहरों और नागरिकों के अस्तित्व के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है।

हिमाचल प्रदेश के शहरी केंद्र अब केवल संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह अब तेजी से ए.आई. सक्षम स्मार्ट शहरों के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं।

बुटेल ने राज्य की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में हिमाचल ने तकनीक के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है।

उन्होंने कहा कि हिम सेवा पोर्टल के माध्यम से वर्तमान में 550 से अधिक नागरिक-केंद्रित सेवाएं एआई के उपयोग से प्रदान की जा रही हैं।

हिमाचल प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने अपनी स्टेट डेटा होस्टिंग पॉलिसी अधिसूचित की है।

डेटा-संचालित युग में बेहतर विश्लेषण और सटीक नीति निर्धारण के लिए डेटा का व्यवस्थित और सुलभ होना अनिवार्य है, जिसे हमने संभव कर दिखाया है।

उन्होंने हिम डेटा पोर्टल और एआई आधारित दस्तावेज सत्यापन प्रणाली के विभिन्न लाभों की जानकारी देते हुए कहा कि पहले राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों को मैन्युअल सत्यापन में हफ्तों लग जाते थे।

अब हमारा ए.आई. सक्षम सिस्टम रीयल-टाइम फीडबैक प्रदान करता है, जिससे नागरिकों को जमा करने से पहले सुधार का मौका मिलता है।

गोकुल बुटेल ने कहा कि हिमसोमसा, पंचायती राज और शहरी विकास के डिजिटल सुधारों, विशेषकर परिवार रजिस्टर के माध्यम से राज्य सरकार को प्रतिवर्ष 60 करोड़ रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत हो रही है।

नवाचार के मानवीय चेहरे पर बल देते हुए उन्होंने हिम परिवार और माई डीड जैसी योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि माई डीड के माध्यम से हिमाचल पूरी तरह से पेपरलेस संपत्ति पंजीकरण प्रणाली लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है, जिसने बिचौलियों को खत्म कर तहसील कार्यालय को सीधे नागरिक के मोबाइल स्क्रीन पर पहुंचा दिया है।

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