देश ने 22 सितंबर को अगली पीढ़ी के जीएसटी युग में किया प्रवेश : टंडन

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सोलन। दून विधानसभा क्षेत्र के बरोटीवाला में भाजपा प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने जीएसटी उत्सव कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय टंडन ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान टैक्स को भ्रष्टाचार का एक बहुत बड़ा माध्यम बनाया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने पर टैक्स को सरल कर जनता के लिए एक सुविधा का केंद्र बनाया गया। जीएसटी इस इच्छा शक्ति का एक बहुत बड़ा उदाहरण है।

2017 को भारत में दशकों का सबसे साहसिक आर्थिक सुधार हुआ। मानसून की उस एक सुबह, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने 17 अलग-अलग करों और 13 उपकरों को एक एकीकृत ढांचे के साथ बदल दिया, जिससे मूल रूप से देश की राजकोषीय संरचना को नया आकार मिला।

यह केवल एक कर सुधार नहीं था, यह एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार की ओर भारत की साहसिक यात्रा की शुरुआत थी। आठ साल बाद अब यह परिवर्तन किसी असाधारण घटना से कम नहीं लगता है।

कर संग्रह 2017-2018 के 7.19 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-2025 में 22.08 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड वृद्धि के साथ तीन गुना हो गया है। इसके साथ ही करदाताओं का आधार 65 लाख से दोगुना होकर 1.5 करोड़ हो गया है, जिससे लाखों लघु उद्यमों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल किया जा सका है।

इस आधार पर आगे बढ़ते हुए, भारत ने अब 22 सितंबर से अगली पीढ़ी के जीएसटी युग में प्रवेश कर लिया है, जिसमें इस प्रणाली को 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो स्लैब में सुव्यवस्थित कर दिया गया है, साथ ही इसमें 40 प्रतिशत की स्लैब लग्जरी और डिमेरिट वस्तुओं के लिए रखी गई है।

घरों में दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएं, दवाओं और शिक्षा सामग्री की आपूर्ति पर 5 प्रतिशत के बीच कर लगने से परिवारों को अधिक बचत होगी, जबकि किसानों को ट्रैक्टरों, टायरों, कीटनाशकों और सिंचाई उपकरणों पर कम जीएसटी लगने से अधिक लाभ प्राप्त होगा जिससे इनपुट लागत में कमी आएगी और ग्रामीण आय में वृद्धि होगी।

इसके साथ ही ऑटो सेक्टर को भी इससे बड़ी राहत मिली है क्योंकि स्कूटर और कारों पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है। अब 2,500 रुपये तक की कीमत वाले (पहले 1,000 रुपये) रेडीमेड कपड़ों पर भी केवल 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

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