बच्चों और किशोरों का शोषण रोकना लक्ष्य : दिव्यांशु

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सभी एसडीएम की अध्यक्षता में बनेगी टास्क फोर्स
शिमला। बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक अतिरिक्त उपायुक्त दिव्यांशु सिंघल की अध्यक्षता में बचत भवन में आयोजित की गई।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जिला में बाल मजदूरी को रोकने के लिए बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के नियमों का पालन सख्ती से होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह अधिनियम बच्चों और किशोरों के शोषण को रोकने के लिए बनाया गया एक कानून है, जिसके तहत 14 साल से कम उम्र के बच्चों को खतरनाक कामों में लगाने पर रोक है। इसके अलावा यह 14 से 18 साल के बच्चों और किशोरों की कार्य परिस्थितियों को भी नियंत्रित करता है।

जिला के सभी उप मंडल स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इस टास्क फोर्स के माध्यम से अधिनियम को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि श्रम विभाग हर महीने उपायुक्त कार्यालय में सूचना देंगे कि एक महीने में कितने निरीक्षण किए गए।

अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जिले में किसी भी संस्थान में कोई बच्चा या किशोर नियमों के विरुद्ध कार्य करता नहीं पाया जाना चाहिए, यह दंडनीय अपराध है। इस अपराध के तहत दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

उन्होंने श्रम विभाग को निर्देश दिए कि वे जिला टास्क फोर्स की टीम का शेड्यूल बनाकर नियमित रूप से जिले में संस्थानों का निरीक्षण करें।

उन्होंने कहा कि आम जन को बाल मजदूरी के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है ताकि आम जन भी नियमों का उल्लंघन करने पर तुरंत सूचना प्राप्त हो सके ।

उन्होंने कहा कि बच्चे मां बाप के डर से बाल मजदूरी तो नहीं कर रहा है। इस तरह के मामलों को संजीदगी से देखा जाना चाहिए। मां बाप और बच्चों को जागरूक करना जरूरी है। बच्चों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए ।

इस मौके पर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कानून एवं व्यवस्था पंकज शर्मा ने कहा कि 14 वर्ष तक की आयु के बच्चे हर हाल में स्कूल में होने चाहिए। बाल मजदूरी किसी भी सूरत पर स्वीकार नहीं है।

शिमला शहर में रिज माल रोड़, लोअर बाजार में बच्चे लोगों को सामान बेचते देखे जाते है, ऐसी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जाये।

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