उन्होंने कहा कि यह अधिनियम बच्चों और किशोरों के शोषण को रोकने के लिए बनाया गया एक कानून है, जिसके तहत 14 साल से कम उम्र के बच्चों को खतरनाक कामों में लगाने पर रोक है। इसके अलावा यह 14 से 18 साल के बच्चों और किशोरों की कार्य परिस्थितियों को भी नियंत्रित करता है।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जिले में किसी भी संस्थान में कोई बच्चा या किशोर नियमों के विरुद्ध कार्य करता नहीं पाया जाना चाहिए, यह दंडनीय अपराध है। इस अपराध के तहत दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
उन्होंने श्रम विभाग को निर्देश दिए कि वे जिला टास्क फोर्स की टीम का शेड्यूल बनाकर नियमित रूप से जिले में संस्थानों का निरीक्षण करें।
उन्होंने कहा कि आम जन को बाल मजदूरी के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है ताकि आम जन भी नियमों का उल्लंघन करने पर तुरंत सूचना प्राप्त हो सके ।
उन्होंने कहा कि बच्चे मां बाप के डर से बाल मजदूरी तो नहीं कर रहा है। इस तरह के मामलों को संजीदगी से देखा जाना चाहिए। मां बाप और बच्चों को जागरूक करना जरूरी है। बच्चों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए ।
शिमला शहर में रिज माल रोड़, लोअर बाजार में बच्चे लोगों को सामान बेचते देखे जाते है, ऐसी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जाये।
