वन भूमि पर नाजायज कब्जे को लेकर हाई कोर्ट के आदेशों को सही से समझ कर अमल कर सरकार, पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की नसीहत

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पालमपुर। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि उच्च न्यायालय ने वन भूमि पर नाजायज कब्जे को समाप्त करने का सरकार को आदेश दिया है।

सोशल मीडिया में डाली एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि इस आदेश का पालन करने के लिए सरकार ने वन भूमि पर लगे हुए सेब के पौधों को काटना शुरू किया है।

सेब से लदे हुए पौधों को काटने का सब तरफ विरोध हो रहा है। इस आदेश को रोकने के लिए सरकार सर्वोच्च न्यायालय जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार को सर्वोच्च न्यायालय जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। उच्च न्यायालय ने वन भूमि पर नाजायज कब्जा समाप्त करने का आदेश दिया है। उच्च न्यायालय ने सेब से लदे पौधों को काटने का आदेश नही दिया है।

सरकार कब्जा की गई वन भूमि पर लोहे की कांटेदार तार का बाड़ लगाये और वहां एक बोर्ड लगाया जाए जिस पर लिखा जाए, सरकार ने इस भूमि पर अवैघ कब्जा समाप्त कर दिया है और अब यह बगीचा वन विभाग का है।

इतनी कार्यवाही करने से उच्च न्यायालय के आदेश का पालन हो जाएगा और नाजायज कब्जा भी समाप्त हो जाएगा और सेब से लदे पौधे भी बच जाएगे और वन विभाग लगे लगाये बगीचे का मालिक बन जाएगा।

शांता कुमार ने कहा कि लगता है सर्वोच्च न्यायालय जाने का एक और कारण है। वन भूमि पर नाजायज कब्जा करने वाले प्रभावशाली लोग हैं, उनमें बहुत से नेता शामिल हैं।

वे आदेश पर रोक लगा कर इस बार अवैध कब्जा की गई भूमि पर लगी सेब की फसल स्वंय काटना चाहते हैं। उनके प्रभाव में सरकार उच्च न्यायालय के आदेश का ठीक अर्थ नही समझ रही है।

उन्हें विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय यही कहेगा कि उन्होंने नाजायज कब्जा समाप्त करने के लिए कहा है, सेब के पौधे को काटने के लिए नहीं कहा।

उन्होंने कहा कि इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय ले जाकर सरकार उपहास का कारण न बने।

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