5 से 11 अक्टूबर तक आयोजित होगा अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा

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मुख्यमंत्री ने की राज्य स्तरीय कुल्लू दशहरा समिति की बैठक की अध्यक्षता

शिमला। अंतर्राष्ट्रीय लोकनृत्य उत्सव कुल्लू दशहरा- 2022 के आयोजन से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए राज्य स्तरीय कुल्लू दशहरा समिति की बैठक आज यहां मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय लोकनृत्य उत्सव कुल्लू दशहरा 5 से 11 अक्तूबर तक आयोजित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेले व त्योहार हमारी समृद्ध लोक संस्कृति के द्योतक हैं। इनका संरक्षण एवं सवंर्द्धन सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार कृतसंकल्प है और इस दिशा में समय-समय पर विभिन्न कदम उठाए गए हैं। कुल्लू दशहरा प्रदेश ही नहीं बल्कि विश्व में अपनी एक अलग पहचान है। यह हमारी धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरा इसलिए विशिष्ट है कि देश के अन्य भागों में जब दशहरे उत्सव का समापन होता है, तब कुल्लू का सात दिवसीय ऐतिहासिक दशहरा उत्सव शुरू होता है।

जय राम ठाकुर ने दशहरा उत्सव के लिए सभी तैयारियां समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने उत्सव के दौरान हिमाचल प्रदेश के गठन के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदर्शनियों के माध्यम से हिमाचल की विकास यात्रा को प्रदर्शित करने के भी निर्देश दिए। सूचना एवं जन संपर्क विभाग को लघु वृत्त चित्र तैयार कर इनका प्रदर्शन सुनिश्चित करने को कहा।

हिमाचल तब और अब विषय पर आधारित इन वृत्तचित्रों में लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ऊर्जा, उद्योग, कृषि एवं बागवानी सहित अन्य क्षेत्रों में हुई प्रगति को दर्शाया जाएगा। उन्होंने उत्सव के दौरान उचित सुरक्षा व्यवस्था व निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

शिक्षा, भाषा, कला एवं संस्कृति मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने दशहरा उत्सव आयोजन सम्बन्धी जिला स्तरीय समिति तथा जिला कारदार संघ के साथ आयोजित बैठकों की जानकारी दी। उन्होंने उत्सव के आयोजन से सम्बन्धित विभिन्न सुझाव भी दिए।

बैठक में दशहरा उत्सव समिति की गत वर्ष की आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया तथा अन्य मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में निर्णय लिया गया कि दशहरा उत्सव में जिला के सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया जाएगा तथा उत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठान परंपरागत ढंग से आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त उत्सव में हिमाचल तथा बाहरी राज्यों के सांस्कृतिक दलों को भाग लेने के लिए आमंत्रित करने पर भी चर्चा की गई।

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