शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार आज जो महिलाओं को 1500 देने के लिए फार्म भरवा रही है वह महज चुनावी स्टंट हैं। भाजपा प्रदेश मीडिया सहप्रभारी रमा ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की पूरे देश भर में क्या दुर्गति हो गई है यह किसी से नहीं छुपा हैं।
आज कांग्रेस के बड़े बड़े नेता लोकसभा चुनाव से लड़ने से पीछे हट रहे हैं। कई जगह तो हालात इतने बदतर हैं कि मिले हुए टिकट भी वापिस किए जा रहे हैं। उन्होंने सुक्खू सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को चुनावों से पहले ही क्यों महिलाओं की याद आती है, सिर्फ इसलिए की प्रदेश कि महिलाएं भोली भाली व भावनात्मक सोच रखती हैं।
सहप्रभारी रमा ठाकुर ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि महज चुनावों को प्रभावित करने के लिए आज मुख्यमंत्री सुक्खू चुनावों से चंद रोज पहले बिना बजट के प्रावधान व आधी- अधूरी महिला आबादी को इस योजना का लाभ देने की बात कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की 22 लाख महिलाओं को 1500 देने की घोषणा के बाद आज कितनी महिलाओं को पात्रता शर्तों के बाद यह राशि देने की बात की जा रही, उसे भी सरकार सार्वजनिक करें।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आभास है कि लोकसभा चुनावों में तो उन्हें प्रत्याशी तक नसीब नहीं होंगे परन्तु हिमाचल में जो सरकार की स्थिति बनी है, उससे उबरने के लिए जो कार्य उन्हें सत्ता में आते ही करने चाहिए थे उन्हें आज उपचुनाव को देखते हुए कर रहे हैं।
भूलना उनकी आदत में शुमार है। जिस प्रकार चुनावों के समय भरे फार्म को कूड़े के डिब्बे में डाल दिया था उसी प्रकार चुनाव निपटते ही इनको भी डाल दिया जायेगा।
ठाकुर ने मुख्यमंत्री के इस ब्यान को निराधार बताया कि भाजपा महिला विरोधी है। प्रदेश की महिलाएं जानती हैं कि अगर महिलाओं के विषय में किसी ने सोचा हैं तो वो केंद्र की मोदी सरकार ने सोचा है। आज उज्जवला योजना सहित ऐसी अनगिनत योजनाएं हैं जोकि महिलाओं को समाज में आत्मसम्मान के साथ जीने के लिए प्रेरित करती हैं। वहीं प्रदेश में में भी महिलाओं के लिए बहुत सी योजनाएं चलाई गई जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सके।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अपनी सरकार को बचाने के लिए एक बार फिर महिलाओं को ठगने का प्रयास न करे। साथ ही उन्होंने सरकार से प्रश्न भी किया कि यदि सरकार महिलाओं को ठगना नहीं चाहती तो फार्म पर 13
नंबर पर दिखाई जा रही शर्तों का मतलब क्या है।
आपने जो वादा जिस स्थिति में प्रदेश की मातृ शक्ति से किया था उसे आदर्श आचार संहिता के बाद उसी स्थिति में पूरा किया जाए।
