धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश राजीव गांधी पंचायती राज संगठन द्वारा किसान बचाओ-पंचायती राज मजबूत बनाओ का नारा देकर शिमला से शुरु की गई पदयात्रा का शुक्रवार को धर्मशाला में समापन हुआ।
इस मौके पर जिलाधीश कांगड़ा के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा गया, जिसके माध्यम से अध्यादेश के जरिए लाए गए तीनों कृषि कानूनों का वापस लेने की मांग की गई।
12 दिवसीय पदयात्रा प्रदेश के विभिन्न जिलों से होती हुई धर्मशाला पहुंची और गांधी चौक पर कार्यकर्ता एकत्रित हुए। इस मौके पर राजीव गांधी पंचायत राज संगठन के प्रदेशाध्यक्ष दीपक राठौर ने कहा कि यह पदयात्रा 5 जिलों के 17 विधानसभा क्षेत्रों से होते हुए धर्मशाला पहुंची है।
उन्होंने कहा कि केेंद्र सरकार ने जो 3 काले कानून लाए हैं, उनसे किसानों को अपने उत्पाद का दाम तय करने के लिए बड़े-बड़े उद्योगपतियों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि इस काननू के लागू होने पर देश के बड़े उद्योगपति, फल-सब्जियों को भंडारण करके मंहगे दामों पर बेचेंगे, जिससे देश की आम जनता पर भार पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार तानाशाही रैवया अपनाकर अंबानी व अडानी को लाभ पहुंचाने का काम कर रही है। राठौर ने कहा कि संबंधित कृषि कानूनों से किसानों और बागवानों का अहित होगा।
32 साल पहले शांता कुमार ने की थी ऐसी पदयात्रा
दीपक राठौैर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने एक ऐसी ही पदयात्रा धर्मशाला से शिमला के लिए की थी और उसके 32 साल बाद शिमला से धर्मशाला के लिए राजीव गांधी पंचायत राज संगठन से यह यात्रा की है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश के किसानों की अनदेखी करने वाली सरकार ज्यादा नहीं चलने वाली है।
50 हजार लोगों को किया जागरुक
संगठन के मीडिया प्रभारी अनिल गोयल ने बताया कि पदयात्रा को लेकर प्रदेशवासियों को पूरा सहयोग मिला और जहां-जहां से संगठन के पदाधिकारी पैदल यात्रा करते हुए धर्मशाला की तरफ बढ़े , वहां-वहां लोगों ने उनका स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि इस दौरान करीब 50 हजार से अधिक लोगों को कृषि कानूनों के दुष्प्रभाव के बारे में जागरुक किया गया और हिमाचल में संविधान के 73वें और 74वें संशोधन को लागू करवाने के लिए जनता से जनमत की मांग की गई ताकि पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत किया जा सके।
